कोरोना की दोहरी मार और भारत की अर्थव्यवस्था
विगत दो मार्च को आर्थिक सहयोग एवं वैश्विक संगठन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कोरोना के प्रकोप से दुनिया में 2008 की वैश्विक मंदी जैसा दृश्य सामने आ रहा है।
कांग्रेस की ‘खुदकुशी’ कौन रोकेगा?
जब अनुशासन की बागडोर कमजोर होती है, विचार धारा जब स्पष्ट नहीं होती हैं, सक्रियता के राजनीतिक मुददों पर लाभ-हानि का विचार नहीं होता है तब कोई राजनीतिक संगठन कमजोर ही होता है, लगातार पतन की ओर ही जाता है, चुनावों में हार को ही प्राप्त करता है।
कोरोना आपदा में अच्छे मानसून की खबर
देश में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य रहने का अनुमान है। यह खबर खेती-किसानी, कृषि मजदूर और उससे जुड़े व्यापारियों के लिए सुकून देने वाली है। यही खेती हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।


























