Chandrayaan-3: चंद्रयान 3 को लेकर इसरो चीफ ने दी बहुत बड़ी गुड न्यूज! कर दिया बड़ा ऐलान!

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Chandrayaan-3: चंद्रयान 3 को लेकर इसरो चीफ ने दी बहुत बड़ी गुड न्यूज! कर दिया बड़ा ऐलान!

Chandrayaan-3: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) चीफ एस सोमनाथ ने वीरवार को एक न्यूज कॉन्क्लेव में जानकारी देते हुए बताया कि चंद्रयान-3 का रोवर प्रज्ञान चंद्रमा की सतह पर स्लिपिंग मोड में चला गया है, लेकिन उन्हें पूरी उम्मीद है कि वो दोबारा से एक्टिव मोड में आ जाएगा। इसरो चीफ के अनुसार अंतरिक्ष एजेंसी को अच्छी तरह से पता है कि रोवर प्रज्ञान और लैंडर विक्रम चंद्रमा की सतह पर फिलहाल के लिए निस्क्रय हो गए हैं लेकिन उनके दोबारा से एक्टिव होने को लेकर भी इंकार नहीं किया जा सकता। सोमनाथ ने कहा कि उनका ‘चंद्रयान-3’ का मेन मकसद चाँद पर सॉफ्ट लैंडिंग करने का था, बावजूद इसके चंद्रयान 3 ने लैंडिंग के अगले 14 दिनों तक कई प्रयोग किए और इस दौरान मिशन से जुड़े कुछ जरूरी डेटा भी इकट्ठे किए गए हैं। Chandrayaan-3

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Chandrayaan-3: चंद्रयान 3 को लेकर इसरो चीफ ने दी बहुत बड़ी गुड न्यूज! कर दिया बड़ा ऐलान!

कॉन्क्लेव में बोलते हुए प्रज्ञान रोवर से संपर्क साधने के इसरो के प्रयासों पर एस सोमनाथ ने कहा ‘‘अब यह चांद की सतह पर शांति से सो रहा है…इसे अच्छे से सोने दो…हम इसे परेशान न करें…जब यह अपने आप उठना चाहेगा, तो उठेगा…।’’ इसरो प्रमुख ने कहा कि हमें पूरी उम्मीद है और इस उम्मीद के कारण प्रज्ञान रोवर एवं विक्रम लैंडर हैं।

इसरो चीफ ने बताया कि रोवर का परीक्षण तब किया गया जब पारा माइनस 200 डिग्री सेल्सियस था तो यह उससे भी कम तापमान पर सक्रिय रहा, उसके फंक्शन काम करते हुए पाए गए। हालांकि, परीक्षण अच्छी तरह से नहीं किया जा सका। मिशन 42 दिनों तक चला और इस लंबे मिशन के बाद रोवर को लैंडिंग के दौरान कुछ झटके भी लगे। यह रोवर विकिरण के संपर्क में भी आया। जिसके कारण प्रज्ञान के सामने कुछ कठिनाई आ सकती है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक कोशिश कर रहे हैं और डेटा के अनुसार पता लगाया जा रहा है। इसलिए इन सभी पहलुओं को देखते हुए प्रज्ञान के बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।  Chandrayaan-3

इसरो प्रमुख ने साफ किया कि क्या हुआ जो हमारा संपर्क प्रज्ञान से दोबारा नहीं हुआ, हमारा चंद्रयान-3 मिशन का जो उद्देश्य था, सॉफ्ट लैंडिंग का, वो तो पूरा हो ही चुका है और इसरो के वैज्ञानिक मून मिशन के माध्यम से इकट्ठा किए हुए डेटा के अनुसार पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। चीफ के अनुसार चंद्रमा पर लैंडिंग के बाद प्रयोगों के अनुसार दो-चार सितंबर के दिन लैंडर और रोवर स्लिपिंग मोड में चले गए। सूरज डूबने से चंद्रमा पर पहले 2 सितंबर को रोवर इसके दो दिनों के बाद, 4 सितंबर को लैंडर को स्लीप मोड में डाला गया था और उम्मीद जताई जा रही थी कि 22 सितंबर के आसपास अगले सूर्योदय पर रोवर जाग जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका और वैज्ञानिक दोबारा उनसे संपर्क नहीं कर सके। वैसे लैंडर और रोवर को (धरती के समय के मुताबिक लगभग 14 दिन) एक चंद्र दिन की अवधि तक संचालित करने के लिए डिजाइन किया गया है। लेकिन इस अवधि के अनुसार उनके सक्रिय होने से संबंधित कोई भी संकेत फिलहाल उन्हें नहीं मिले हैं। इस संबंध में इसरो ने 22 सितंबर को कहा था – ‘‘नया चंद्र दिवस शुरू होने के बाद विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर से संपर्क साधने की कोशिश की गई हैं। Chandrayaan-3

उल्लेखनीय यह है कि चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त को अपना मिशन पूरा करने तुए इतिहास रचा था। इससे भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास पहुंचने वाला पहला देश बन गया। इससे पहले अमेरिका, सोवियत संघ (वररफ अब रूस) और चीन चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग कर चुके थे, लेकिन दक्षिणी ध्रव पर उनमें से भी कोई देश नहीं पहुंचा था।