Must be a teacher to be ordinary'

‘साधारण होने का गुरूर होना चाहिए’

 आप सत्ता-सादगी के बीच कितना अंतर समझते है। देखिए, मुझे नजदीक से जानने वाले लोग भलीभांति जानते हैं कि मैं जो हूं, वैसा ही रहूंगा। मैं सन 2004 से लेकर 2014 तक लगातार दो बार उड़ीसा विधानसभा का सदस्य रहा हूं। तब भी लोग सोचते थे मैं बदल जाउंगा। वहां भी साईकिल से लगातार आना-जाना […]
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