Bangladesh News: बांग्लादेश में बच्चों पर आफत! खसरे के कहर से 1 लाख से अधिक संदिग्ध मामले

खराब पोषण और कमजोर टीकाकरण व्यवस्था से बच्चों पर बड़ा संकट

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Bangladesh Child Health: ढाका। बांग्लादेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों के बीच खसरा (मीजल्स) और अन्य संक्रामक बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। खराब स्थितियां, कुपोषण, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, इलाज में देरी और बढ़ते चिकित्सा खर्च के कारण हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार की एक रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 से 30 जून 2026 के बीच देश में खसरे के संदिग्ध मामले 1,01,077 दर्ज किए गए, जबकि 6,258 बच्चों की मौत इस बीमारी से जुड़ी बताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि खसरा एक बार फिर बांग्लादेश के लिए गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभरा है। Bangladesh News

रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में हर साल पांच वर्ष से कम उम्र के लगभग 24,000 बच्चों की मौत निमोनिया के कारण होती है। इसका मतलब है कि प्रतिदिन औसतन 60 बच्चों की जान निमोनिया से चली जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि कुपोषित बच्चों में खसरा और निमोनिया जैसी बीमारियों से गंभीर जटिलताओं और मौत का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। खसरा एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जिसका संक्रमण फैलने की क्षमता कोरोना वायरस से भी अधिक मानी जाती है। विशेष रूप से कुपोषित शिशु और छोटे बच्चे इसके सबसे बड़े शिकार बन रहे हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि बांग्लादेश में बच्चों के टीकाकरण का दायरा भी लगातार घट रहा है। वर्ष 2019 में 12 से 23 महीने के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज 83.9 प्रतिशत था, जो 2023 में घटकर 81.6 प्रतिशत रह गया। शहरी क्षेत्रों में यह कवरेज केवल 79 प्रतिशत है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 84.6 प्रतिशत बच्चों को पूरा टीकाकरण मिल पा रहा है। हालांकि जन्म के समय बीसीजी (बीसीजी) टीके की कवरेज 98 प्रतिशत से अधिक है, लेकिन 15 महीने की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते बड़ी संख्या में बच्चे टीकाकरण का पूरा कोर्स पूरा नहीं कर पाते। विशेष रूप से खसरा-रूबेला (एमआर-2) की दूसरी खुराक छूटने के मामले चिंता का विषय बने हुए हैं। Bangladesh News

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुपोषण और स्तनपान की कम दरें बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर रही हैं। देश में केवल 56 प्रतिशत शिशुओं को ही जन्म के बाद पहले छह महीने तक केवल मां का दूध मिल पाता है। किशोरावस्था में मातृत्व, पर्याप्त मातृत्व अवकाश का अभाव, कामकाजी महिलाओं के लिए स्तनपान की सुविधाओं की कमी, जागरूकता की कमी और फॉर्मूला दूध की आसान उपलब्धता को इसके प्रमुख कारणों में गिना गया है। इसके अलावा, बच्चों के भोजन में आयरन, विटामिन ए, विटामिन डी और जिंक जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की कमी भी गंभीर समस्या बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के 43.6 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं, जिनमें दो वर्ष से कम आयु के बच्चों की संख्या सबसे अधिक है।

रिपोर्ट में टीकाकरण कार्यक्रम से जुड़ी चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया है। ईपीआई (विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम) से जुड़े स्वास्थ्यकर्मियों ने टीकाकरण कार्ड, रजिस्टर और अन्य आवश्यक रिकॉर्ड पुस्तिकाओं के साथ-साथ टीकों की उपलब्धता में कमी की भी शिकायत की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पोषण, टीकाकरण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में तत्काल सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में बच्चों के स्वास्थ्य पर संकट और गहरा सकता है। Bangladesh News

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