BRICS Summit 2026: भारत दौरे पर कैसी होगी शी जिनपिंग की सुरक्षा? जानें सीक्रेट कमांडो, बुलेटप्रूफ कार और अभेद्य सुरक्षा कवच

BRICS Summit 2026: भारत दौरे पर कैसी होगी शी जिनपिंग की सुरक्षा? जानें सीक्रेट कमांडो, बुलेटप्रूफ कार और अभेद्य सुरक्षा कवच

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सितंबर 2026 में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन को लेकर दुनिया की नजर भारत पर टिकी हुई है। इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। यदि उनका दौरा तय होता है, तो यह कोविड-19 महामारी और 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। ऐसे में न केवल दोनों देशों के कूटनीतिक संबंध चर्चा में हैं, बल्कि शी जिनपिंग की अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था भी सुर्खियां बटोर रही है।

सेंट्रल सिक्योरिटी ब्यूरो संभालता है सुरक्षा की जिम्मेदारी

चीन के राष्ट्रपति की सुरक्षा का जिम्मा सेंट्रल सिक्योरिटी ब्यूरो (Central Security Bureau) के पास होता है। इस एजेंसी की स्थापना 1949 में माओ त्से तुंग की सुरक्षा के लिए की गई थी। इसके बाद से यह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेताओं की सुरक्षा संभाल रही है। रिपोर्टों के अनुसार, इस ब्यूरो में करीब 8,000 विशेष रूप से प्रशिक्षित जवान तैनात हैं। इनका चयन चीन की सेना की विभिन्न रेजीमेंटों से किया जाता है। पूरी सुरक्षा इकाई कई ग्रुप और रेजीमेंटों में बंटी होती है और इसे यूनिट 8341, यूनिट 57001 या सेंट्रल गार्ड रेजीमेंट के नाम से भी जाना जाता है।

बेहद गोपनीय होते हैं सुरक्षा के नियम

शी जिनपिंग की सुरक्षा में तैनात कमांडो बेहद सख्त और गोपनीय नियमों का पालन करते हैं। उन्हें सार्वजनिक रूप से अपना वास्तविक नाम बताने की अनुमति नहीं होती। यहां तक कि परिवार को भेजे जाने वाले पत्रों में भी व्यक्तिगत जानकारी के बजाय केवल रेजीमेंट और पद का उल्लेख किया जाता है।

राष्ट्रपति के चारों ओर हमेशा 6 से 8 पर्सनल कमांडो का सबसे अंदरूनी सुरक्षा घेरा मौजूद रहता है। सुरक्षा में किसी तरह की चूक से बचने के लिए इन अंगरक्षकों की समय-समय पर अदला-बदली भी की जाती है।

आधुनिक हथियारों और हाई-टेक उपकरणों से लैस कमांडो

चीनी राष्ट्रपति की सुरक्षा में तैनात अंगरक्षक आधुनिक हथियारों और अत्याधुनिक संचार उपकरणों से लैस रहते हैं। उनके पास आधुनिक पिस्टल, मशीनगन और हाई-टेक वायरलेस कम्युनिकेशन सिस्टम होते हैं, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके। विदेशी या घरेलू दौरे से पहले सुरक्षा एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण करते हैं। अग्रिम सुरक्षा दल मुख्य काफिले से पहले पहुंचकर पूरे इलाके का सुरक्षा मूल्यांकन करता है।

ऐसा होता है राष्ट्रपति का सुरक्षा काफिला

शी जिनपिंग का सड़क काफिला कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था के साथ चलता है। सबसे आगे पायलट वाहन और मोटरसाइकिल पर सवार सुरक्षा कर्मी होते हैं। इनके पीछे सुरक्षा एजेंसियों और अधिकारियों के वाहन चलते हैं। इसके बाद राष्ट्रपति का मुख्य काफिला होता है, जिसमें कई बख्तरबंद गाड़ियां और कमांडो शामिल रहते हैं। पूरे मार्ग पर बाहरी सुरक्षा का जिम्मा स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के पास रहता है, ताकि आम लोगों और संभावित खतरों को राष्ट्रपति के काफिले से दूर रखा जा सके।

होंकी N501: शी जिनपिंग की बख्तरबंद लिमोजिन

शी जिनपिंग की आधिकारिक कार Hongqi N501 एक अत्याधुनिक बुलेटप्रूफ लिमोजिन है। इसकी खिड़कियां और बॉडी पूरी तरह बख्तरबंद होती हैं, जो गंभीर हमलों का सामना करने में सक्षम मानी जाती हैं। इस कार में आधुनिक संचार प्रणाली, विशेष सुरक्षा तकनीक और कई गोपनीय फीचर मौजूद हैं, जिनकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती। इसे चीन के राष्ट्रपति की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर विशेष रूप से तैयार किया गया है।

क्या भारत दौरे पर भी साथ आएंगे चीनी कमांडो?

विदेश यात्राओं के दौरान शी जिनपिंग के विशेष अंगरक्षक और उनकी आधिकारिक बुलेटप्रूफ गाड़ियां आमतौर पर उनके साथ ही यात्रा करती हैं। यदि उनका भारत दौरा तय होता है, तो उनकी Hongqi N501 कारों को विशेष कार्गो विमान के जरिए पहले ही नई दिल्ली लाया जा सकता है।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के अनुसार भारत में राष्ट्रपति के बाहरी सुरक्षा घेरे, ट्रैफिक प्रबंधन और कार्यक्रम स्थलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भारतीय सुरक्षा एजेंसियों, दिल्ली पुलिस और अन्य संबंधित संस्थाओं की होगी। वहीं, शी जिनपिंग की व्यक्तिगत सुरक्षा की जिम्मेदारी उनके विशेष सुरक्षा दस्ते के पास ही रहेगी।

दुनिया की रहेगी नजर

गलवान घाटी की घटना के बाद यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं, तो यह दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाएगा। ऐसे में BRICS सम्मेलन के दौरान उनकी सुरक्षा व्यवस्था, कूटनीतिक गतिविधियां और भारत-चीन संबंध वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बने रहेंगे।

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