Juvenile Idiopathic Arthritis: बच्चों को भी हो सकता है गठिया, जोड़ों में दर्द और सुबह की अकड़न को न करें नजरअंदाज

बच्चों को भी हो सकता है गठिया, जोड़ों में दर्द और सुबह की अकड़न को न करें नजरअंदाज

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Juvenile Idiopathic Arthritis:  आमतौर पर गठिया का नाम सुनते ही लोगों के मन में बुजुर्गों की तस्वीर उभरती है। यही कारण है कि कई माता-पिता मानते हैं कि बच्चों को गठिया जैसी बीमारी नहीं हो सकती। लेकिन यह धारणा सही नहीं है। बच्चों में भी गठिया हो सकता है और इसके लिए परिवार में पहले से किसी सदस्य को यह बीमारी होना जरूरी नहीं है। यदि बच्चे के जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन या सुबह उठने पर अकड़न महसूस होती है, तो इसे सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

मधुकर रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल की कंसल्टेंट पीडियाट्रिक रूमेटोलॉजिस्ट डॉ. अंजू सिंह के अनुसार, बच्चों में जोड़ों से जुड़ी समस्याओं को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। सही समय पर जांच और उपचार से बीमारी को नियंत्रित करने तथा जोड़ों को होने वाले नुकसान के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।

बच्चों में क्यों होता है गठिया?

बच्चों में गठिया के प्रमुख प्रकारों में से एक जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस (JIA) है। यह सूजन से जुड़ी बीमारियों का एक समूह है, जिसकी शुरुआत 16 वर्ष की उम्र से पहले हो सकती है। इसके सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। हालांकि, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और आनुवंशिक तथा पर्यावरणीय कारक इसमें भूमिका निभा सकते हैं।

इस बीमारी में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से जोड़ों को प्रभावित करने लगती है। इससे जोड़ों में सूजन, दर्द और अकड़न हो सकती है। गंभीर स्थिति में बच्चे को चलने-फिरने, सीढ़ियां चढ़ने, खेलने और रोजमर्रा के काम करने में भी परेशानी हो सकती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि परिवार में किसी को गठिया न होने पर भी बच्चे में यह बीमारी विकसित हो सकती है।

हर जोड़ों का दर्द गठिया नहीं

बच्चे के जोड़ों में दर्द या सूजन होने का मतलब हमेशा गठिया नहीं होता। खेलते समय चोट लगने, गिरने या अधिक शारीरिक गतिविधि करने से भी दर्द हो सकता है। कुछ संक्रमणों के बाद भी कुछ समय तक जोड़ों में परेशानी बनी रह सकती है। वहीं, कुछ मामलों में जोड़ में संक्रमण होने की आशंका रहती है, जिसके लिए तत्काल उपचार जरूरी होता है।

इसलिए माता-पिता को बच्चे की परेशानी की अवधि, दर्द की तीव्रता और अन्य लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए। यदि दर्द बार-बार हो रहा है या सूजन लंबे समय तक बनी रहती है, तो चिकित्सकीय जांच करवाना बेहतर है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

बच्चे कई बार अपनी परेशानी ठीक से बता नहीं पाते। ऐसे में माता-पिता को उनके व्यवहार और चलने-फिरने में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी चाहिए।

  • सुबह उठने के बाद जोड़ों में अकड़न रहना।

  • घुटनों, टखनों, कलाई या अन्य जोड़ों में लगातार सूजन।

  • बिना चोट के लंगड़ाकर चलना या पैर पर वजन डालने से बचना।

  • हाथ-पैर मोड़ने और सीधा करने में परेशानी होना।

  • सीढ़ियां चढ़ने, दौड़ने या पहले की तरह खेलने में कठिनाई होना।

  • लगातार थकान महसूस करना या सामान्य गतिविधियों में रुचि कम होना।

इन लक्षणों का मतलब यह नहीं है कि बच्चे को गठिया ही है। हालांकि, यदि परेशानी लंबे समय तक बनी रहती है या बार-बार दिखाई देती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

बुखार के साथ जोड़ में सूजन हो तो रहें सतर्क

यदि बच्चे का कोई जोड़ अचानक गर्म और सूज जाए तथा इसके साथ बुखार, तेज दर्द या पैर पर वजन न डाल पाने जैसी परेशानी हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। यह जोड़ में संक्रमण का संकेत भी हो सकता है, जिसमें देर करना नुकसानदायक साबित हो सकता है।

कैसे होती है बच्चों में गठिया की जांच?

डॉक्टर सबसे पहले बच्चे के लक्षणों, दर्द की अवधि, सुबह होने वाली अकड़न और चलने-फिरने में आए बदलावों के बारे में जानकारी लेते हैं। इसके बाद जोड़ों की जांच की जाती है। जरूरत पड़ने पर खून की जांच से सूजन से जुड़े संकेतों का पता लगाया जा सकता है। कुछ मामलों में अल्ट्रासाउंड या एमआरआई भी करवाया जा सकता है।

गठिया की पुष्टि के लिए कोई एक जांच पर्याप्त नहीं होती। डॉक्टर बच्चे के लक्षणों, शारीरिक जांच और अन्य जांचों के नतीजों को मिलाकर बीमारी का आकलन करते हैं। जरूरत पड़ने पर बच्चे को पीडियाट्रिक रूमेटोलॉजिस्ट के पास भेजा जा सकता है।

समय पर इलाज से कम हो सकता है नुकसान का खतरा

बचपन में हड्डियों और जोड़ों का विकास लगातार होता रहता है। ऐसे में लंबे समय तक सूजन बने रहने और उचित उपचार न मिलने से जोड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। कुछ बच्चों में शारीरिक विकास भी प्रभावित हो सकता है।

बीमारी की स्थिति के अनुसार डॉक्टर सूजन और दर्द कम करने वाली दवाएं, बीमारी को नियंत्रित करने वाली दवाएं तथा फिजियोथेरेपी जैसी सुविधाएं सुझा सकते हैं। नियमित जांच से बीमारी की स्थिति पर नजर रखने और उपचार में आवश्यक बदलाव करने में मदद मिलती है।

गठिया के साथ आंखों की जांच भी जरूरी

कुछ बच्चों में जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस के साथ आंखों में सूजन भी हो सकती है। चिंता की बात यह है कि कई बार आंखों में सूजन होने के बावजूद शुरुआत में स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। इसलिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित आंखों की जांच करवाना भी महत्वपूर्ण है।

माता-पिता इन बातों का रखें ध्यान

बच्चों में गठिया को रोकने का कोई निश्चित तरीका फिलहाल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में माता-पिता के लिए जरूरी है कि वे बच्चे के स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों को गंभीरता से लें। जोड़ों में दर्द, सूजन, सुबह की अकड़न, बुखार या चलने के तरीके में बदलाव दिखाई देने पर इन लक्षणों की जानकारी रखें और डॉक्टर को बताएं।

याद रखें, बच्चों में जोड़ों का लगातार दर्द हमेशा सामान्य थकान नहीं होता। समय पर पहचान, सही जांच और उचित उपचार से बीमारी को नियंत्रित करने तथा बच्चे को सामान्य गतिविधियों में मदद मिल सकती है।

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