Health News: कम उम्र में हार्ट अटैक का कारण कोविड वैक्सीन! जानें इसकी सच्चाई

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नई दिल्ली (एजेंसी)। Health News: इंडियन काउंसिल आॅफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने पूरे देश के 47 अस्पतालों से 18 से 45 साल की उम्र के लोगों की अचानक मौत (सडन डेथ) से जुड़े कारणों का विश्लेषण किया। यह स्टडी इंडियन जर्नल आॅफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित हुई है। इसमें दावा किया गया है कि देश में युवाओं की अचानक मौत के लिए कोविड वैक्सीन जिम्मेदार नहीं है, बल्कि वैक्सीन ने जोखिम को कम किया है। हालांकि अचानक हार्ट अटैक क्यों आया, नाचते-गाते व्यक्ति की एकदम से मौत क्यों हो गई, इस पर स्थिति अब भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाई है। स्टडी में ज्यादा शराब पीना, लाइफस्टाइल, स्मोकिंग समेत तमाम पहलुओं का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इससे अचानक मौत की आशंका बढ़ती है। एक्सपर्ट भी कहते हैं कि अचानक मौत के लिए एक कारण नहीं हो सकता बल्कि मल्टीपल फैक्टर जिम्मेदार होते हैं।

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Health News: कम उम्र में हार्ट अटैक का कारण कोविड वैक्सीन! जानें इसकी सच्चाई

धमनियों में रुकावट | Health News

इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के कंसल्टेंट हार्ट स्पेशलिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट और सर्जन डॉ. वरुण बंसल का कहना है कि सडन कार्डिएक डेथ के कई कारण हो सकते हैं। इसमें एक बड़ा कारण प्लाक का फटना भी होता है। प्लाक एक ऐसा वसायुक्त पदार्थ (कैल्शियम) है, जो हार्ट की धमनियों में जमा हो जाता है। अगर किसी को हार्ट में 20-30% तक ब्लॉकेज है तो वह प्लाक बन जाता है। धमनियों में जमा प्लाक के फटने से अचानक कुछ ही मिनटों में धमनी में रुकावट 20-30% तक बढ़कर 100 फीसदी तक हो जाती है। ऐसा तब हो सकता है जब कोई कड़ी मेहनत करता है, बहुत ज्यादा शारीरिक श्रम करने से कई बार प्लाक एकदम से फट जाता है और मैसिव हार्ट अटैक हो जाता है। धमनियों में प्लाक बहुत ज्यादा खतरनाक हैं।

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टीके से कोई संबंध नहीं | Health News

डॉ. वरुण बंसल का कहना है कि सडन कार्डिएक डेथ की बहुत सारी वजहें हैं। कोविड वैक्सिनेशन से इसका कोई संबंध नहीं है। युवाओं को हार्ट की नसों में बहुत ज्यादा बीमारी नहीं होती। उनके हार्ट को आदत नहीं है कि एकदम से ब्लड सप्लाई रुक जाएगी तो कैसे झेल पाएंगे। यही कारण है कि सडन हार्ट अटैक की वजह से उनकी मौत हो जाती है। लाइफस्टाइल में चेंज भी एक फैक्टर है। सालों से एक्सरसाइज नहीं करने वाले जब एकदम से हेवी एक्सरसाइज करते हैं तो यह भी खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कोविड के कई वैरिएंट आने की वजह से सबक्लिनिकल वायरल इंफ्केशन हुआ है और लगभग सभी इसकी चपेट में आए हैं। वायरल पूरे शरीर पर असर करता है और पूरे शरीर की नसों में सूजन हो जाती है और सूजन भी हार्ट अटैक का कारण बन जाती है। हार्ट की नसों में ज्यादा असर इसलिए दिखता है क्योंकि ज्यादा ब्लड सप्लाई की जरूरत होती है। ब्लड सप्लाई में कमी आए तो नुकसान ज्यादा हो सकता है। वायरल इंफ्केशन की वजह से नसों में सूजन होती है।

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कोविड के बाद असर बरकरार

दिल्ली मेडिकल काउंसिल के प्रेजिडेंट डॉ. अरुण गुप्ता का कहना है कि आईसीएमआर की स्टडी में एक चीज यह सामने आई है कि इसका कोविड वैक्सीन से कोई संबंध नहीं है। अचानक होने वाली मौत में कोई एक कारण नहीं होता है। मल्टीपल फैक्टर होते हैं और आईसीएमआर की रिपोर्ट में भी यही सामने आया है कि कोविड से पहले और ठीक होने के बाद भी लंबे समय तक अस्पताल में रहना, बदली हुई जीवनशैली और परिवार में अचानक मौत का इतिहास होना भी अचानक मौत के कारण हो सकते हैं। ऐसे मामलों में अचानक मौत की संभावना ज्यादा रहती है। लाइफस्टाइल भी एक कारण हो सकता है। स्टडी के हिसाब से विश्लेषण करें तो जिन लोगों ने डबल डोज ली थी, उनमें अचानक मौत के कम मामले सामने आए हैं। वहीं जिन्होंने सिंगल डोज ली थी या वैक्सानेशन नहीं करवाया था, उनमें ये मामले करीब-करीब बराबर थे। हालांकि सिंगल डोज वालों को भी फायदा हुआ था। वैक्सिनेशन का सडन डेथ से कोई संबंध नहीं है। वैसे लोग जिन्हें बहुत ज्यादा सीवियर कोविड हुआ था, बेशक वे ठीक हो गए थे लेकिन उनके शरीर पर कुछ न कुछ असर रह गया। यह बाद में कुछ और फैक्टर के साथ मिलकर उनकी मौत का कारण बना।

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