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…कभी अस्त नहीं हो सकता ‘सच’ का सूरज

12 महीने, 365 दिन या एक बरस। मुमकिन है, आप सबके लिए इन तीनों ही संज्ञाओं का एक ही रटा-रटाया (The sun of ‘truth)  अर्थ हो यानि महज ‘कलेंडर’ में बदलाव। लेकिन, हर गुजरते पल के साथ एक अनकही-अनसुनी-अंजानी सी ‘पीर’ सहने वाले किसी भी शख्स से चंद पल बतियाएंगे तो बखूबी मालूम चल जाएगा […]
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