Poem

Poem: तूफा आए पर दिया बुझे नहीं

हर चेहरा खिला रहे आशाओं का दीप जला रहे दिल में जज्बे की वही तान हो आसमां छूने की वहीं शान हो कह उठे दिल वही हर्ष !हर्ष! हर्ष! तुम आओ खुशियां लाओ हर बार नववर्ष ! नववर्ष ! तूफा आए पर दिया बुझे नहीं सर झुके नहीं कदम रुके नहीं माथे पर बुलंदियों का […]
साहित्य 

पलकें बिछाए कब से, बाट हम जोह रहे थे…

Poem For Saint Dr. MSG: आपके नूर की फिर हुई बरसात, प्रेमियों ने घी के दिए जलाए हैं । महका-महका हुआ समां, पूज्य गुरु जी घर आए हैं।। अजी! देखो चंद्रमा भी शरमाया, दो जहां का खुदा लौट आया है। पावन धूली चरणों की लगा मस्तक पर धरा ने भी खुशियों के गीत गाए हैं। […]
देश  अनमोल वचन  अध्यात्म  न्यूज़ ब्रीफ 

Happy Diwali:-(इबके दिवाली घरा जाइयो रे..)

बाहर पढ़निए, अर काम करणीय, थोड़ा सा गौर फरमाईंयो रे, भाई ज्यादा कुछ नी कहेंदा, इबके दिवाली अपने-अपने घरा जाइयो रे….2 भाई काम धंधे की छोड़ के टेंशन, थाने अपने घरा जाणा हैं, इबकी बार दिवाली का त्यौहार, माँ-बावू गेल मनाणा हैं अर जितना माँ थारा लाड करे नी, थम उसते ज्यादा प्यार जातियों रे, […]
देश  साहित्य  न्यूज़ ब्रीफ 

कविता – माँ मैं फिर आऊंगा

Kavita: तेरे आँगन को, किलकारियों से फिर महकाऊँगा ! तूं घबरा मत ! माँ मैं फिर आऊंगा बेशक दुनिया से विदा हो चला, पर तेरे आस – पास सदा मैं रहूंगा, झेली हो छाती पर गोलियां कितनी, पर दर्द भरी कहानियाँ तुझसे न कहूंगा ! मत रोना मेरी कब्र पर, किस्सा फिर कभी सुनाऊंगा। तूं घबरा […]
साहित्य 

बाल कविता : नये युग का बालक

घिसे-पिटे परियों के किस्से नहीं सुनूँगा, खुली आँख से झूठे सपने नहीं बुनूँगा। मुझे पता चंदा की धरती पथरीली है, इसलिए धब्बों की छाया भी नीली है। चरखा कात रही है नानी मत बतलाओ, पढ़े-लिखे बच्चों को ऐसे मत झुठलाओ। इन्द्रधनुष के रंग इन्द्र ने नहीं बनाएं, पृथ्वी का है बोझ न कोई बैल उठाए। […]
बच्चों का कोना 

सच कहूँ की वर्षगांठ पर विशेष

सच कहूँ सा कोई अखबार नहीं देखा एक दौर था जब झूठ सरेआम बिकता था। उस दौर में भी ये सच बेखौफ लिखता था। इसने कभी भी दोगली नजरों से संसार नहीं देखा। सच में, मैंने ‘‘सच कहूँ’’ सा कोई अखबार नहीं देखा। सिर्फ खबरें नहीं, ये तहजीब भी ले कर आता है। गुरुओं की […]
देश  विचार  सच कहूँ विशेष स्टोरी  न्यूज़ ब्रीफ 

कुत्ते जिहा ना कोई वफ़ादार

सुत्ता उठ के कोई नहीं खुश हुंदा बुल्लेया ते बड़े सुत्ते जगा के वेखिया ए कुत्ते जिहा कोई नहीं वफादार डिट्ठा ते टुक्कर सुक्का वी पा के वेखिआ ए तोता जदों वी छड्डिए उड्ड जांदा कईआं चूरिआं पा के वेखिआ ए डंग मारनों कदे वी सप्प नहीं हटदा कईआं दूध पिआ के वेखिआ ऐ बिन […]
साहित्य 

कविता: मैं किसान हूँ…

हा मैं किसान हूँ जमीं को चीर कर अन्न उगाने वाला। खुद की पेट काट कर भी सबकी भूख मिटाने वाला। सरकार की बीमार मानसिकता का शिकार हो कर भी पेट भरने वाला आय दोगुनी का लॉलीपॉप दे कर । एक्ट ला हमें खत्म करने वाली सरकार के खिलाफ है हम न हम हिंदुस्तान के […]
साहित्य 

कविता : राष्ट्र जीवंत

राष्ट्र जीवंत रहे दिल में अरमान है सब सुरक्षित रहें दिल में अरमान है देश ही के लिए हों सब अच्छे कर्म यह हर एक देशवासी की पहचान है। तुम ग़रीबी मिटाओगे यह वादा करो मुफ़लिसी को हराओगे वादा करो एकता तुम दिखाओगे यह वादा करो हर बुराई तुम मिटाओगे यह वादा करो गर कोई […]
साहित्य 

कविता : किसान का बेटा हूँ…

किसान का बेटा हूँ , खेतों में किस्मत बोता हूँ। खून पसीने से सींचता हूँ, कुदरत की मार भी सहता हूँ । किसान का बेटा हूँ… खेतों में अपनी किस्मत खोते देखा हूँ। कभी सुखाड़ में तो कभी बाढ़ में, पिता के आँखों मे आँसू देखा हूँ। किसान का बेटा हूँ… अपनी फसलों को खेतों […]
साहित्य 

वो जलाकर बस्ती…

वो जलाकर बस्ती आशियानें की बात करते हैं, मिटाकर हाथों की लकीरें मुक्कदर की बात करते हैं। नादान थे हम चालाकियाँ समझ ही ना पाए, अपना बनाकर हमें वो गैरों की बात करते हैं। छुपाते रहें उम्र भर जिनकी गलतियों को हम, वो महफ़िल में मेरी कमियों की बात करते हैं। गर इतने ही खफा […]
साहित्य 

कविता : एक कहूँ एक, दो कहूँ दुआ

एक कहूँ एक, दो कहूँ दुआ, रटवाती थी हमको बुआ। टू वन जा टू, टूटू जा फोर, लगता यारों कितना बोर। क से कबूतर, ख से खरगोश, पढ़कर हुआ गुड्डू बेहोश। ए फॉर एप्पल, बी फॉर बैट, मोटू नहीं सन्नी बोलो फैट। उतरी हिन्दी की पगड़ी, पहनी हमने अंग्रेजी तगड़ी। डॉ. श्याम सखा ‘श्याम’ अन्य अपडेट हासिल […]
बच्चों का कोना