Poem
<% catList.forEach(function(cat){ %> <%= cat.label %> <% }); %>
<%- node_title %>
Published On
By <%= createdBy.user_fullname %>
<%- node_title %>
Published On
By <%= createdBy.user_fullname %>
<% if(node_description!==false) { %> <%= node_description %>
<% } %> <% catList.forEach(function(cat){ %> <%= cat.label %> <% }); %>
Poem: तूफा आए पर दिया बुझे नहीं
Published On
By Sach Kahoon Desk
हर चेहरा खिला रहे आशाओं का दीप जला रहे दिल में जज्बे की वही तान हो आसमां छूने की वहीं शान हो कह उठे दिल वही हर्ष !हर्ष! हर्ष! तुम आओ खुशियां लाओ हर बार नववर्ष ! नववर्ष ! तूफा आए पर दिया बुझे नहीं सर झुके नहीं कदम रुके नहीं माथे पर बुलंदियों का […]
पलकें बिछाए कब से, बाट हम जोह रहे थे…
Published On
By Sach Kahoon Desk
Poem For Saint Dr. MSG: आपके नूर की फिर हुई बरसात, प्रेमियों ने घी के दिए जलाए हैं । महका-महका हुआ समां, पूज्य गुरु जी घर आए हैं।। अजी! देखो चंद्रमा भी शरमाया, दो जहां का खुदा लौट आया है। पावन धूली चरणों की लगा मस्तक पर धरा ने भी खुशियों के गीत गाए हैं। […]
Happy Diwali:-(इबके दिवाली घरा जाइयो रे..)
Published On
By Sach Kahoon Desk
बाहर पढ़निए, अर काम करणीय, थोड़ा सा गौर फरमाईंयो रे, भाई ज्यादा कुछ नी कहेंदा, इबके दिवाली अपने-अपने घरा जाइयो रे….2 भाई काम धंधे की छोड़ के टेंशन, थाने अपने घरा जाणा हैं, इबकी बार दिवाली का त्यौहार, माँ-बावू गेल मनाणा हैं अर जितना माँ थारा लाड करे नी, थम उसते ज्यादा प्यार जातियों रे, […]
कविता – माँ मैं फिर आऊंगा
Published On
By Sach Kahoon Desk
Kavita: तेरे आँगन को, किलकारियों से फिर महकाऊँगा ! तूं घबरा मत ! माँ मैं फिर आऊंगा बेशक दुनिया से विदा हो चला, पर तेरे आस – पास सदा मैं रहूंगा, झेली हो छाती पर गोलियां कितनी, पर दर्द भरी कहानियाँ तुझसे न कहूंगा ! मत रोना मेरी कब्र पर, किस्सा फिर कभी सुनाऊंगा। तूं घबरा […]
बाल कविता : नये युग का बालक
Published On
By Sach Kahoon Desk
घिसे-पिटे परियों के किस्से नहीं सुनूँगा, खुली आँख से झूठे सपने नहीं बुनूँगा। मुझे पता चंदा की धरती पथरीली है, इसलिए धब्बों की छाया भी नीली है। चरखा कात रही है नानी मत बतलाओ, पढ़े-लिखे बच्चों को ऐसे मत झुठलाओ। इन्द्रधनुष के रंग इन्द्र ने नहीं बनाएं, पृथ्वी का है बोझ न कोई बैल उठाए। […]
सच कहूँ की वर्षगांठ पर विशेष
Published On
By Sach Kahoon Desk
सच कहूँ सा कोई अखबार नहीं देखा एक दौर था जब झूठ सरेआम बिकता था। उस दौर में भी ये सच बेखौफ लिखता था। इसने कभी भी दोगली नजरों से संसार नहीं देखा। सच में, मैंने ‘‘सच कहूँ’’ सा कोई अखबार नहीं देखा। सिर्फ खबरें नहीं, ये तहजीब भी ले कर आता है। गुरुओं की […]
कुत्ते जिहा ना कोई वफ़ादार
Published On
By Sach Kahoon Desk
सुत्ता उठ के कोई नहीं खुश हुंदा बुल्लेया ते बड़े सुत्ते जगा के वेखिया ए कुत्ते जिहा कोई नहीं वफादार डिट्ठा ते टुक्कर सुक्का वी पा के वेखिआ ए तोता जदों वी छड्डिए उड्ड जांदा कईआं चूरिआं पा के वेखिआ ए डंग मारनों कदे वी सप्प नहीं हटदा कईआं दूध पिआ के वेखिआ ऐ बिन […]
कविता: मैं किसान हूँ…
Published On
By Sach Kahoon Desk
हा मैं किसान हूँ जमीं को चीर कर अन्न उगाने वाला। खुद की पेट काट कर भी सबकी भूख मिटाने वाला। सरकार की बीमार मानसिकता का शिकार हो कर भी पेट भरने वाला आय दोगुनी का लॉलीपॉप दे कर । एक्ट ला हमें खत्म करने वाली सरकार के खिलाफ है हम न हम हिंदुस्तान के […]
कविता : राष्ट्र जीवंत
Published On
By Sach Kahoon Desk
राष्ट्र जीवंत रहे दिल में अरमान है सब सुरक्षित रहें दिल में अरमान है देश ही के लिए हों सब अच्छे कर्म यह हर एक देशवासी की पहचान है। तुम ग़रीबी मिटाओगे यह वादा करो मुफ़लिसी को हराओगे वादा करो एकता तुम दिखाओगे यह वादा करो हर बुराई तुम मिटाओगे यह वादा करो गर कोई […]
कविता : किसान का बेटा हूँ…
Published On
By Sach Kahoon Desk
किसान का बेटा हूँ , खेतों में किस्मत बोता हूँ। खून पसीने से सींचता हूँ, कुदरत की मार भी सहता हूँ । किसान का बेटा हूँ… खेतों में अपनी किस्मत खोते देखा हूँ। कभी सुखाड़ में तो कभी बाढ़ में, पिता के आँखों मे आँसू देखा हूँ। किसान का बेटा हूँ… अपनी फसलों को खेतों […]
वो जलाकर बस्ती…
Published On
By Sach Kahoon Desk
वो जलाकर बस्ती आशियानें की बात करते हैं, मिटाकर हाथों की लकीरें मुक्कदर की बात करते हैं। नादान थे हम चालाकियाँ समझ ही ना पाए, अपना बनाकर हमें वो गैरों की बात करते हैं। छुपाते रहें उम्र भर जिनकी गलतियों को हम, वो महफ़िल में मेरी कमियों की बात करते हैं। गर इतने ही खफा […]
कविता : एक कहूँ एक, दो कहूँ दुआ
Published On
By Sach Kahoon Desk
एक कहूँ एक, दो कहूँ दुआ, रटवाती थी हमको बुआ। टू वन जा टू, टूटू जा फोर, लगता यारों कितना बोर। क से कबूतर, ख से खरगोश, पढ़कर हुआ गुड्डू बेहोश। ए फॉर एप्पल, बी फॉर बैट, मोटू नहीं सन्नी बोलो फैट। उतरी हिन्दी की पगड़ी, पहनी हमने अंग्रेजी तगड़ी। डॉ. श्याम सखा ‘श्याम’ अन्य अपडेट हासिल […]