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Kanwar Yatra: यमुनानगर में आस्था, सेवा और पारिवारिक समर्पण का अनूठा दृश्य, पोते और दोहते ने पेश की श्रवण कुमार की मिसाल

यमुनानगर (हि.स.)। सावन मास की कांवड़ यात्रा के दौरान हरियाणा के यमुनानगर में भक्ति, सेवा और पारिवारिक संस्कार का एक प्रेरक दृश्य लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया। पंजाब के दो युवकों ने अपनी 102 वर्षीय दादी को विशेष रूप से तैयार पालकी में बैठाकर हरिद्वार के दर्शन कराए। अब दोनों युवक हर की पौड़ी से गंगाजल लेकर लगभग 300 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए पालकी को अपने कंधों पर उठाकर घर की ओर लौट रहे हैं। यात्रा में बुजुर्ग महिला के साथ उनके पोते सिमरन और 17 वर्षीय दोहते विराट शामिल हैं। जब यह अनोखी यात्रा यमुनानगर के कलानौर क्षेत्र से गुजरी तो पालकी को देखकर श्रद्धालु और राहगीर भावुक हो उठे। कई लोगों ने रुककर युवकों के सेवा भाव की सराहना की और 102 वर्षीय महिला से आशीर्वाद प्राप्त किया। सुनहरी देवी ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें हरिद्वार जाकर गंगा दर्शन और पूजा-अर्चना का अवसर मिलेगा। उन्होंने अपने पोते और दोहते की सेवा भावना पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि हर परिवार में ऐसे संस्कारी और समर्पित बच्चे होने चाहिए। पोते सिमरन ने बताया कि परिवार के बड़े-बुजुर्गों की लंबे समय से इच्छा थी कि उनकी दादी को श्रवण कुमार की परंपरा की तरह पालकी में बैठाकर हरिद्वार ले जाया जाए। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने यह यात्रा शुरू की। गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करने के बाद अब वे गंगाजल लेकर अपने गृह नगर की ओर लौट रहे हैं। यात्रा को सुरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए विशेष डिजाइन की गई पालकी का उपयोग किया गया, जिससे बुजुर्ग महिला को किसी प्रकार की असुविधा न हो। रास्ते भर श्रद्धालु इस सेवा यात्रा का स्वागत कर रहे हैं। यमुनानगर में भी यह दृश्य पारिवारिक मूल्यों, बुजुर्गों के सम्मान और सेवा की प्रेरणादायक मिसाल बन गया।
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