Short Story
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बाल कहानी: नाच न जाने आंगन टेढ़ा |
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By Sach Kahoon Desk
प्राँजली की आदत थी कि वह छोटी से छोटी बात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बोलती थी। क्लास में कोई भी ऐसा बच्चा नहीं था, जिसका वह मज़ाक नहीं उड़ाती थी। कई बार तो उसके दोस्त नाराज हो जाते थे और कई बार हँसकर टाल देते थे। पर ज्यादा समय तक कोई भी उससे गुस्सा रह भी […]
लघुकथा: अपने मनोबल को कभी कमजोर मत होने दो
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By Sach Kahoon Desk
एक बार एक मेढ़क का समूह जंगल में घूम रहा था। तभी अचानक उन समूह में से दो मेढ़क एक गहरे गड्ढे में गिर गये। जब उनके साथी दूसरे मेढ़कों ने उन्हें गहरे गड्ढे में गिरे हुए देखा तो वे बोले की आप इस गड्ढे से बाहर नहीं निकल सकते और अब आप अपनी मौत […]
लघुकथा : एक गिलास दूध की कीमत
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By Sach Kahoon Desk
एक दिन, एक गरीब लड़का जो स्कूल के बाद घर-घर जाकर सामान बेच रहा था, उसने पाया कि उसके पास केवल कुछ पैसा ही बचा है, और वह भूखा था। उसने तय किया कि वह अगले घर पर खाना मांगेगा। हालांकि, जब एक युवती ने दरवाजा खोला, तो उसने संकोच वश भोजन के बदले पानी […]
रोटी या पाप
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By Sach Kahoon Desk
उगते सूरज की किरणें अभी समंदर की इठलाती लहरों को चूम भी नहीं पाई थीं कि फुटपाथ पर बैठे भिखारियों में आपा-धापी मच उठी। सेठ शांति लाल की मोटर वहां आकर रुक चुकी थी। उसकी आवाज उन्हें उसी तरह उद्वेलित कर देती थी, जैसे भोजन का समय होने पर गली में घुमने वाले जानवरों के […]
Nature of saint: संत का स्वभाव
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By Sach Kahoon Desk
एक संत गांव में प्रवेश कर रहे थे। सैकड़ों भक्त उनके पास थे। अचानक एक व्यक्ति संत के सामने आया। उसके हाथ में एक पात्र था। वह कोयले और राख से भरा हुआ था। संत के निकट आते ही उसने राख और कोयला संत के सिर पर फेंक दिया। संत के भक्त क्रोधित हो उठे। […]
बाल कथा : संतोष
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By Sach Kahoon Desk
चाणक्य मगध देश के राजा चन्द्रगुप्त के मंत्री थे। वे बुद्धिमान, तपस्वी और राजनीतिज्ञ थे। चाणक्य मंत्री होते हुए भी बहुत साधारण जीवन व्यतीत करते थे और शहर से बाहर एक झोंपड़ी में रहते थे। एक बार राजा चन्द्रगुप्त ने मंत्री चाणक्य को कुछ कंबल दिए और कहा-इन कम्बलों को शीत ऋतु में जो अभी […]
लघुकथा: आभार
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By Sach Kahoon Desk
हर की पैड़ी पर निरंतर बढ़ती भीड़ को देखते हुए भवगीत का ध्यान चौड़े पाट की ओर गंगा-स्नान करते भक्त पर गया तो वह भी उधर ही जा पहुंचा और घाट पर लगे एंगल को पकड़कर ज्यों ही गोता लगाने को हुआ ही कि उसके पाँव उखड़ गए। बस, फिर क्या था, बरबस ही जीवन-मृत्यु […]
अभिनय का उपहार
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By Sach Kahoon Desk
उन्नीसवीं शताब्दी की घटना है। भारत पर अंग्रेजों का अधिपत्य था। बंगाल नील साहब के अत्याचारों से त्राहि-त्राहि कर रहा था। कलकत्ता के कुछ नवयुवकों ने इन अत्याचारों पर प्रकाश डालने के लिए एक नाटक का आयोजन किया। अन्य अतिथियों के अतिरिक्त प्रकाण्ड विद्वान ईश्वरचन्द्र विद्यासागर भी नाटक देखने के लिए आए। नाटक में विभिन्न […]