कभी दूसरों का भला तो कभी कर्ज उतारने में गरीब हो रहा नगर निगम गुरुग्राम

Gurugram
  • जुर्माने के रूप में भी करोड़ों रुपये भुगतान कर चुका है निगम
  • अब नगर निगम की आर्थिक हालत हो रही है खस्ता

संजय कुमार मेहरा
गुरुग्राम। गुरुग्राम नगर निगम एक ऐसे दुधारू पशु की तरह हो गया है, जिसे दोहने का काम तो सब करते हैं, लेकिन जब उसे जरूरत पड़ती है तो सबके हाथ खड़े हो जाते हैं। दूसरों को देते-देते अब नगर निगम गुरुग्राम हालत पतली हो गई है।

जुर्माना समेत तमाम तरह के खर्चों से नगर निगम की आर्थिक हालत कमजोर हो गई है। सबसे पहले बात करें गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड पर बंधवाड़ी डंपिंग स्टेशन की। कूड़े का सही तरह से निपटान नहीं होने की वजह से नगर निगम पर 2 करोड़ 80 लाख रुपये का जुमार्ना लगाया गया।

इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं आया। वहां से कूड़े का निपटान करके पर्यावरण-वातावरण को बेहतर बनाने के आदेश राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) की ओर से निगम को दिए गए थे। नगर निगम इस बार भी आदेशों का पालन नहीं कर पाया। ऐसी स्थिति में एनजीटी ने निगम के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सीधे 100 करोड़ रुपये का जुर्माना ठोंक दिया। यह जुर्माना कहने को तो हरियाणा सरकार पर लगाया गया था, लेकिन विषय गुरुग्राम नगर निगम से जुड़ा था तो यह जुर्माना नगर निगम को ही भरना पड़ा।

दूसरे विभागों का 118 करोड़ बिजली का बिल भी भरा

जुर्माने के अलावा नगर निगम पर बिजली के बिलों का बोझ भी डाला गया। भले ही ये बिल नगर निगम के ना हों, लेकिन आदेशों का पालन करते हुए नगर निगम को ही बिल भरने पड़े। प्रदेश के विभिन्न विभागों पर दक्षिण हरियाणा बिजली निगम लिमिटेड (डीएचबीवीएन) के करीब 118 करोड़ रुपये बिजली बिलों के रूप में बकाया था। सरकार के आदेशों पर यह भारी-भरकम राशि भी नगर निगम के खाते से बिजली निगम में दी गई। गुुरुग्राम नगर निगम अपने खर्च के साथ फरीदाबाद के खर्चे भी उठा रहा है। सूत्रों के अनुसार फरीदाबाद का कूड़ा उठाने के लिए हर माह करीब 250 रुपये नगर निगम गुरुग्राम की ओर से दिए जा रहे हैं।

नगर निगम फरीदाबाद भी गुरुग्राम का कर्जदार

वर्ष 2010 में नगर निगम गुरुग्राम द्वारा नगर निगम फरीदाबाद को सालाना ब्याज पर 150 करोड़ रुपये कर्ज देने का मामला काफी उछला था। काफी विरोध भी इस फैसले का किया गया। पार्षदों ने भी इस पर खूब आवाज उठाई, लेकिन पैसा दिया ज चुका था। वर्ष 2022 तक 12 साल में 150 करोड़ रुपये में 50 करोड़ रुपये ब्याज के जुड़ गए और यह राशि 200 करोड़ हो गई। यह कर्ज देने के दो साल बाद अगस्त 2012 में नगर निगम गुरुग्राम के सभी 35 पार्षदों ने मेयर व निगमायुक्त से मांग की थी कि वे फरीदाबाद नगर निगम से यह पैसा वापस मंगवाएं, ताकि गुरुग्राम का बेहतर विकास हो सके। मेयर व निगमायुक्त ने आश्वासन दिया था कि वे इस पर प्रयास कर रहे हैं। 2012 के बाद अब 10 साल बीत चुके हैं, फिर भी बात सिरे नहीं चढ़ पाई है।

जीएमडीए को दिए 500 करोड़ रुपये भी फंसे

वर्ष 2017 में गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने भी नगर निगम से 500 करोड़ रुपये उधार लिए थे। क्योंकि तब जीएमडीए के पास कोई फंड नहीं था। नगर निगम का यह पैसा भी फंस गया है। जीएमडीए से जब निगम ने यह पैसा मांगा तो वहां से जवाब मिला कि सारा पैसा गुरुग्राम में विकास कार्यों पर खर्च हो चुका है।

निगम के खातों में मात्र 650 करोड़ रुपये

नगर निगम गुरुग्राम के सालाना बजट खर्च की बात करें तो एक साल में विभिन्न कार्यों पर यह 1200 करोड़ रुपये खर्च करता है, जबकि वर्तमान में निगम के बैंक खातों में मात्र 650 करोड़ रुपये ही बाकी बचे हैं। ऐसे में निगम की आर्थिक स्थिति काफी नाजुक हो चुकी है। यही हाल रहा तो नगर निगम के पास अपने अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन देने के लाले पड़े जाएंगे।

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