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    द.अफ्रीका दौरा: सरकार, तीन पक्षकारों से जवाब तलब

    Article 370

    नैनीताल 09 जनवरी (एजेंसी)

    दक्षिण अफ्रीका दौरे के नाम पर हुए आर्थिक गड़बड़ी के मामले में उच्च न्यायालय ने सख्त रूख अख्तियार करते हुए राज्य सरकार, दक्षिण अफ्रीका दौरे पर जाने वाले दो अधिकारियों समेत चार पक्षकारों से विस्तृत हलफनामा पेश करने को कहा है। सभी को 14 फरवरी तक जवाब पेश करना है। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायूर्ति रमेश चंद खुल्बे की पीठ ने सुनवाई के बाद राज्य सरकार, तत्कालीन मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक डीवीएस खाती, राजाजी नेशनल पार्क के निदेशक जीएस पांडे तथा टूर आपरेटर मुकंद प्रसाद को 14 फरवरी तक विस्तृत जवाब पेश करने को कहा है।

    न्यायालय ने गाजियाबाद निवासी जे पी डबराल की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद ये निर्देश जारी किये हैं। इन पर्सन पेश होने वाले याचिकाकर्ता मंगलवार को कोर्ट में पेश नहीं हो पाये। इसके बावजूद कोर्ट ने मामले में सुनवाई की और मामले को गंभीरता से लिया। न्यायालय में उप प्रभागीय वनाधिकारी आर के तिवारी की ओर से जवाब पेश किया गया है। श्री तिवारी के जवाब के बाद कई लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन व न्यायूर्ति रमेश चंद खुल्बे की पीठ ने सुनवाई के बाद प्रदेश सरकार, तत्कालीन मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक डीवीएस खाती, राजाजी नेशनल पार्क के निदेशक जीएस पांडे व टूर आपरेटर मुकंद प्रसाद को 14 फरवरी तक विस्तृत जवाब पेश करने को कहा है।

    उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता की ओर से इस मामले में गंभीर आर्थिक अनियमितता के आरोप लगाये गये हैं। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वर्ष 2006 में स्टडी टूर के नाम पर तत्कालीन वन मंत्री नव प्रभात तथा कुछ सरकारी अधिकारियों द्वारा दक्षिण अफ्रीका का दौरा किया गया। इस दौरे पर जाने के लिये 20 लाख रुपये की धनराशि सीएफडी, उत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण अकादमी हल्द्वानी से ली गयी।

    सरकारी दावों के हिसाब से इस दौरे पर लगभग छह लाख रूपये की धन राशि खर्च हुई। बाकी 14 लाख रुपये की धनराशि सरकारी खाते में काफी विलंब से जमा करायी गयी। इस धनराशि को 2007 से 2012 के बीच कई किश्तों में लौटाया गया लेकिन इस राशि पर व्याज जमा नहीं कराया गया। यह धनराशि इतने समय तक किसके पास जमा थी, यह भी नहीं पता। इसके बाद कोर्ट ने सीएफडी से इस मामले में जवाब पेश करने को कहा था। सीएफडी की ओर से पेश जवाब में कहा गया कि उन्हें बाकी धनराशि के संबंध में जानकारी नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने उप प्रभागीय वनाधिकारी आरके तिवारी से जवाब पेश करने को कहा था।

     

     

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