Anmol Vachan: करोड़ों गुणा बढ़कर है 'उसकी' लज्जत, नशा, मिठास है जो हमेशा बनी रहती है!

हरिरस की लज्जत अवर्णनीय है: पूज्य गुरु जी

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Anmol Vachan: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि हरिरस, अमृत, आबोहयात् जो हमारे अंदर मालिक ने शुरू से ही भर रखा है उसमें जो मिठास, लज्जत है, वो अवर्णनीय है। दुनिया में इन्द्रियां और जीह्वा के स्वाद के रस में लोग बचपन से लेकर बुढ़ापे तक फंसे रहते हैं। इन्द्रियों के भोग-विलास और जीह्वा के क्षणिक आनंद के लिए लोग पागल होकर घूमते रहते हैं लेकिन इन सबसे करोड़ों गुणा बढ़कर अल्लाह, वाहेगुरु, राम के नाम की, वो लज्जत, नशा, मिठास है जो हमेशा बनी रहती है। वह लगातार चलता रहता है, इसलिए हर धर्म में संतों ने लिखा है कि यदि रस लेना है तो राम-नाम का रस लो, क्योंकि मालिक की धुन बड़ी ही मीठी है। 

पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जो मालिक की धुन की मिठास को पा लेते हैं ऐसी जीवात्मा जीवित रहते हुए भी इस मृत्युलोक में अपने परमपिता परमात्मा के दर्शन करती हैं और मालिक की दया-मेहर के काबिल बन जाती हैं। इसलिए यह मनुष्य जन्म मिला है। इंसान बुराई की तरफ भागते रहते हैं। मनुष्य जन्म इसलिए नहीं मिला कि बुरे कर्म करो। यह जन्म अच्छे-नेक कर्म करने के लिए और प्रभु-परमात्मा के नूरी स्वरूप की भक्ति कर उसकी दया-मेहर, रहमत को प्राप्त करने के लिए मिला है। जो लोग वचनों के अनुसार चलते हैं, वो जरूर मालिक की दया-मेहर के लायक बन जाया करते हैं। उन्हें मालिक पल-पल खुशियां देता है।

हरिरस, अमृत, आबोहयात् मालिक ने सबके अंदर लबालब भरा है, लेकिन कई लोग इस दुनिया में ऐसे ही आते हैं और उस आबोहयात, हरिरस को दबा-दबाया लेकर वापस चले जाते हैं। इसके विपरीत वो लोग भागों वाले होते हैं जो अपने इस हरिरस को चख पाते हैं। इस हरिरस को पाकर वो दोनों जहानों की खुशियों से मालामाल हो जाते हैं। ऐसे हरिरस को अगर आप पीना चाहते हैं तो छल-कपट छोड़ो, शातिराना चालें छोड़ो। सीधे, सच्चे दिल से अपनी गलतियों के लिए उस अल्लाह, वाहेगुरु, राम से माफी मांगो। आपकी जो बीमारियां, जो कमियां आपमें हैं साध-संगत के सामने पीर-फकीर से माफी मांग लो तो वह मालिक क्षमा जरूर कर देंगे और फिर से आप उसकी दया-मेहर के काबिल बन जाएंगे। जो जीव पीर-फकीर से माफी मांग लेते हैं, वो जीव अपने निजघर में जाकर मालिक की गोद में विराजमान हो जाते हैं।

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