Anmol Vachan: पूज्य गुरु जी ने बताया-सुख-शांति और परमानंद हासिल करने के लिए क्या करें?

‘परमानंद हासिल करने के लिए करें राम-नाम का सुमिरन’

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सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan)फरमाते हैं कि इन्सान दुनिया में सुख-शांति परमानंद के लिए जीता है, लोगों ने परमानंद हासिल करने के लिए अलग-अलग रास्ते बना रखे हैं। किसी को यूं लगता है पैसा कमाओ ठग्गी, बेइमानी, भ्रष्टाचार किसी भी तरीके से कमाओ। जितना पैसा कमाओगे उसमें सुख है, उसमें शांति है, सारा सामान मिल जाता है, दुनिया से क्या लेना है, लेकिन यकीन मानो कबीर जी के वचन हैं ‘माया होई नागनी, जगत रही बहकाए, जो इसकी सेवा करे उसको ही ये खाए’। Anmol Vachan

पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि ऐसे-ऐसे लोगों को देखा, जो बहुत धनाढ़य हैं, बड़े-बड़े महल हैं, लेकिन उनकी औलाद नहीं, बीमारियों ने घेरा डाल रखा है, संगमरमर के पत्थर काटने को आते हैं, यानि घर में दिल नहीं लगता। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि आप जितनी ठग्गी, बेईमानी, भ्रष्टाचार, बुरे कर्म से कमाते हैं वो एक-एक पैसा आपको दु:खी, परेशान करता रहेगा। सुख-सुविधा, बंगले-बगीचे, गाड़ियां सब कुछ आ जाता है, लेकिन अंदर चैन नहीं आता।

पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि कोई सोचता है अपनी वाह-वाह करवाओ, कोई दूसरों को झुकाने में, दूसरों का हक मार कर खाने में सुख-शांति समझते हैं। इस तरह अलग-अलग रास्ते बना रखे हैं। पीर-फकीर की बात नहीं मानना, मनमते चलना, बुरे कर्म करना, भक्ति-ईबादत नहीं करना। पर मालिक से मांगना कि सब कुछ मुझे ही दे दे, बाकी को दे या न दे।

पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि मालिक सब कुछ दे रहा है, उसी का सब कुछ दिया हुआ है और वो देता है। ऐसे-ऐसे लोगों को देखा है, जिनका बुरा हश्र था, लेकिन आज जहाज पर सवार हैं, लाखों करोड़ों के मालिक हैं। अंदर से बेचैन थे, टेंशन, चिंता में घिरे रहते थे, लेकिन ओऊम, अल्लाह, वाहेगुरु, राम के नाम ने उन्हें अंदर बाहर से पवित्र बना दिया और वो आत्मिक शांति से मालामाल हो गए। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि परम पिता परमात्मा, अल्लाह, वाहेगुरु, राम, मालिक का नाम सुखों की खान है। Anmol Vachan

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