शिक्षा और रोजगार
Anmol Vachan: ऐसा 'सच' जो आत्मा और परमात्मा को मिला दे!
इन्सानियत की भलाई को समर्पित ही सच्चा मुरीद: पूज्य गुरु जी
Anmol Vachan: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि सतगुरु, मौला, मुर्शिदे-कामिल इस घोर कलियुग में उस सच को कहा जाता है, जो आत्मा और परमात्मा को मिला दे। आत्मा सुमिरन करे तो मालिक उस नूरी स्वरूप में आकर दर्श-दीदार देते हैं। उसी का नाम गुरु, मुर्शिदे-कामिल है, और जो मुरीद इन्सानियत की भलाई के कार्य करता है, वो सच्चा मुरीद कहलाता है।
आपजी फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में रूहानियत के रास्ते पर चलना बहुत मुश्किल है। बहुत सारी समस्याएं इन्सान के रास्ते में आती हैं। काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, मन-माया, ये इन्सान को हर समय चारों तरफ से घेरे रखते हैं। आपने कभी मकड़जाल देखा हो, मकड़ी अपना जाल बुनती है, इस तरह से बुनती है कि छोटा सा कीट-पतंगा भी उसे टच करता है तो निकल नहीं पाता, उसी में फंस जाता है और मकड़ी आकर उसे निगल जाती है, ठीक उसी तरह काल ने इन सातों का ऐसा चक्रव्यू रचा है, क्या मजाल कि इन्सान इससे निकल सके। चक्रव्यू को तोड़ने का एक मात्र उपाय है मालिक पर दृढ़ यकीन और वचनों पर अमल करना।