Anmol Vachan: ऐसे बरस सकती है इंसान पर मालिक की कृपा-दृष्टि!
सुमिरन के लिए भी एक नियम बनाएं: पूज्य गुरु जी
Anmol Vachan: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि इन्सान अगर भगवान की कृपा को पाना चाहे, तो इस धरती पर रहता हुआ भी उसको हासिल कर सकता है। इसके लिए जरूरी है नियमों को बनाना और खुद को उस पर चलाना। जो नियम संत, पीर-फकीर सत्संग या रूहानी मजलिसों में बताते हैं कि आपने अपने जीवन में जो नियम बनाए हैं, उनमें यह भी जोड़ लो कि घंटा सुबह, घंटा शाम मालिक के नाम का सुमिरन करना है। अगर आप मालिक का नाम जपेंगे, तो मालिक की कृपा-दृष्टि बरसेगी। सुमिरन से आदमी को वो परमानन्द मिलता है, जिसकी वह कभी कल्पना भी नहीं करता। अंदर-बाहर कोई कमी नहीं रहती, खुशियों से मालामाल हो जाता है और असीम शांति मिलती है। पर यह जरूरी है कि आप नियम बनाएं।
आप जी फरमाते हैं कि सुमिरन के बिना मालिक को पाना, उसकी खुशियां हासिल करना बड़ा ही मुश्किल है। अगर आप सुमिरन करेंगे, वचनों पर चलेंगे, तो मालिक की खुशियों को पाया जा सकता है। इसलिए आपके अंदर जो कमियां हैं, उनको निकाल दीजिए। इन्सान को कमियों के बारे में खुद मालूम नहीं पड़ता, लेकिन आप ज्यों-ज्यों सुमिरन करते जाओगे, त्यों-त्यों मालिक की कृपा-दृष्टि को हासिल करते जाओगे और अंदर-बाहर मालिक की दया-मेहर, रहमत से आप मालामाल हो जाएंगे।
पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि सब दु:खों, परेशानियों का मुकम्मल हल राम के नाम का सुमिरन करना है। इस पर कोई जोर नहीं लगता, घर-बार नहीं छोड़ना, कपड़े नहीं बदलना, खान-पान में कोई बदलाव नहीं। बस! अच्छा बोलो, अच्छा करो, अच्छे कर्म करो, अच्छा खाना खाओ। अच्छा खाने से मतलब यह नहीं है कि आप डट के खाओ। मतलब कि ऐसा न खाओ, जैसे मांस, अंडा को छोड़ दो। ये राक्षस प्रवृति बना देती है। आपको जितनी भूख है उससे आधी या एक रोटी कम ही खाओ, जो आपके हाजमे के लिए, तंदरूस्ती के लिए बहुत ही बढ़िया रहता है। आप आधी ज्यादा खा लेते हैं तो दु:खी होते रहते हैं। इसलिए संत हर वो बात बताते हैं, जिसमें आपका फायदा हो, खुशी हो। इसलिए सुमिरन करते हुए, वचनों पर रहते हुए आगे बढ़ो, तो मालिक तमाम खुशियां बख्शते हैं और गम, दु:ख-दर्द, चिंता दूर कर देते हैं।