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MSG Mahotsav Bhandara: शाह मस्ताना जी को नाचते देख सेवादारों को क्यों रोक देते थे साईं जी?
‘यह मस्ताना है मस्ताना’
अपने मुर्शिद पूजनीय बाबा सावण सिंह जी महाराज की ओर से बख्शी हुई मस्ती में पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज इतना नाचते कि पता ही नहीं चलता। चारों तरफ धूल ही धूल हो जाती। सेवादार आप जी को बैठाने की बहुत कोशिश करते। कई बार पकड़कर दूर ले जाते। इस पर पूजनीय बाबा सावण सिंह जी उन सेवादारों को रोक देते व साथ ही वचन भी फरमाते, ‘‘न रोको, यह मस्ताना है मस्ताना । मस्ती में नाचता है। इसके वश का रोग नहीं है। इसे मालिक का प्रेम नचाता है।’’ कभी कभी आप जी इतना नाचते कि बेहोश होकर वहीं गिर जाते।
पूजनीय बाबा सावण सिंह जी महाराज स्टेज से खुद उतर कर आपजी के पास आ जाते व अपनी लोई (चादर) उतार कर आपजी को बड़े ही प्यार के साथ दे देते। एक बार ऐसा ही देखकर किसी सत्संगी भाई ने पूजनीय बाबा जी के चरणों में बेनती की कि सतगुरु जी! आपजी मस्ताना जी को सच्चा प्यार करते हो, इसका क्या कारण है? बाबा जी तो रहमत के समुन्द्र थे। उन्होंने फरमाया, ‘‘यह तो बबर शेर है, जितना प्रेम मस्ताने अकेले के पास है इतना सारे मृतलोक में भी किसी के पास नहीं है व मालिक तो प्रेम का भूखा है।’’
सौजन्य: सच्चे रूहानी रहबर भाग-1
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