Business News: भारत-नेपाल डिजिटल भुगतान को मिलेगा नया आयाम: एडीबी

एशियन डेवलपमेंट बैंक ने भारत-नेपाल डिजिटल पेमेंट कॉरिडोर को एक बड़े अवसर के रूप में पहचाना

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India-Nepal Digital Payments: काठमांडू। एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने भारत-नेपाल डिजिटल पेमेंट कॉरिडोर को एक बड़े अवसर के रूप में पहचाना है और कहा कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और रेमिटेंस के प्रवाह में बड़ा सुधार हो सकता है। एडीबी ने अपनी रिपोर्ट 'नेपाल में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा: बेहतर व्यापार सुविधा के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड और पॉलिसी डेवलपमेंट' में कहा कि व्यापार और रेमिटेंस के जरिए नेपाल और भारत के बीच हर साल अरबों डॉलर का लेन-देन होता है, फिर भी डिजिटल पेमेंट सिस्टम में तेजी से हो रही तरक्की के बावजूद अधिकतर लेन-देन पारंपरिक बैंकिंग चैनलों पर ही निर्भर हैं। Business News

रिपोर्ट में नेपाली फिनटेक एक्सपर्ट संजीब सुब्बा के हवाले से कहा गया है कि भारत और नेपाल के बीच आर्थिक संबंधों से डिजिटल पेमेंट का एक ऐसा मौका बनता है जिसका अभी तक अधिक इस्तेमाल नहीं हुआ है। साथ ही, यह भी कहा गया है कि इंटरऑपरेबल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर से दोनों देशों में कारोबारियों और ग्राहकों के लिए कामकाज में ज्यादा कुशलता आ सकती है।

रिपोर्ट में नेपाल के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को मजबूत करने और व्यापार सुगमता में इसकी भूमिका बढ़ाने के लिए क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, नियामकीय समन्वय, भुगतान प्रणालियों की इंटरऑपरेबिलिटी और बाजार एकीकरण को सुदृढ़ करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में घरेलू अवसंरचना और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने के उपायों के साथ-साथ समन्वित शासन व्यवस्था और विभिन्न हितधारकों की भागीदारी पर जोर देने वाले कार्यान्वयन ढांचे के माध्यम से डिजिटल भुगतान प्रणाली के व्यापक विकास का भी जिक्र किया गया है। Business News

वर्ष 2024 में नेपाल राष्ट्र बैंक (नेपाल का केंद्रीय बैंक) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने नेपाल के नेशनल पेमेंट्स इंटरफेस को भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) से जोड़ने की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए नियामकीय संदर्भ शर्तों पर हस्ताक्षर किए थे। मार्च 2024 से भारतीय यात्री नेपाल में फोनेपे या खल्ती के क्यूआर कोड स्कैन कर अपने भारतीय भुगतान ऐप के जरिए व्यापारियों को भुगतान कर सकते हैं। फोनेपे और खल्ती नेपाल के प्रमुख डिजिटल भुगतान सेवा प्रदाताओं में शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया, "इस व्यवस्था को उत्साहजनक सफलता मिली है। शुरुआत के समय प्रतिदिन लगभग 500 लेनदेन होते थे, जो 2025 की शुरुआत तक बढ़कर करीब 2,000 प्रतिदिन हो गए। इससे प्रतिदिन लगभग 60 लाख नेपाली रुपए (करीब 42,000 अमेरिकी डॉलर) का कारोबार हो रहा है, जबकि शुरुआत से अब तक कुल 1.6 अरब नेपाली रुपए (करीब 1.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर) के लेनदेन दर्ज किए जा चुके हैं।" Business News

भारतीय पर्यटकों के अलावा जनवरी 2025 से चीन, इटली, दक्षिण कोरिया, मलेशिया और सिंगापुर के पर्यटक भी नेपालपे क्यूआर का उपयोग कर सकते हैं। नेपालपे नेपाल का राष्ट्रीय डिजिटल भुगतान सिस्टम और ब्रांड है, जिसे नेपाल क्लियरिंग हाउस लिमिटेड ने देश के केंद्रीय बैंक के मार्गदर्शन में विकसित किया है।

हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि ये महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं, लेकिन नेपालियों को भारत और अन्य देशों में क्यूआर कोड के माध्यम से भुगतान करने की सुविधा अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों दिशाओं (बायडायरेक्शनल) में पूरी तरह एकीकृत भुगतान प्रणाली विकसित करने की दिशा में अब भी चुनौतियां बनी हुई हैं। Business News

वर्तमान में भारतीय नागरिक नेपाल में प्रति लेनदेन 1.95 प्रतिशत के मानक शुल्क पर क्यूआर भुगतान कर सकते हैं, लेकिन भारत में नेपालियों के लिए समान सुविधा मुख्य रूप से कमीशन संरचना से जुड़े अनसुलझे मुद्दों के कारण शुरू नहीं हो पाई है। भारत में क्यूआर कोड के जरिए भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगता। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि जब नेपाली ग्राहक भारत में भुगतान करेंगे, तो नेपाली बैंकों को देय सेवा कमीशन का भुगतान कौन करेगा।

रिपोर्ट के अनुसार, "यह स्थिति दर्शाती है कि शुल्क संरचना और नियामकीय दृष्टिकोण में देशों के बीच मौजूद अंतर, तकनीकी रूप से संभव सीमा-पार भुगतान समाधानों के क्रियान्वयन में भी बाधा बन सकते हैं।" एशियाई विकास बैंक ने इसलिए नेपाल-भारत क्यूआर भुगतान के लिए कमीशन संरचना से जुड़े मुद्दों का शीघ्र समाधान करने की सिफारिश की है, ताकि भारत में नेपालियों के लिए पहले से विकसित पारस्परिक (रिसिप्रोकल) भुगतान सुविधा शुरू की जा सके। कमीशन संरचना का विवाद लंबित रहने से भारत में नेपालियों के लिए क्यूआर भुगतान सेवा शुरू होने में लगातार देरी हो रही है। इसी बीच, जून की शुरुआत में दोनों देशों ने सीमा-पार ऑनलाइन फंड ट्रांसफर सेवा शुरू की, जिसके तहत ग्राहक सीधे एक-दूसरे के देशों के बैंक खातों में धनराशि भेज सकते हैं।

इस सेवा का शुभारंभ नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल की भारत यात्रा के दौरान किया गया। इस अवसर पर शिशिर खनाल और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त रूप से इस पहल का उद्घाटन किया, जिससे दोनों देशों में कार्यरत श्रमिकों के लिए सीमा-पार ऑनलाइन धन प्रेषण (रेमिटेंस) की सुविधा उपलब्ध हो गई। एडीबी की रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि भारत, जो नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, उसके साथ सीमा-पार लेनदेन को सरल बनाने और द्विपक्षीय व्यापार भुगतानों में मौजूद प्रमुख अक्षमताओं को दूर करने के लिए यूपीआई जैसी भुगतान संरचना अपनाई जाए। Business News

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