स्कॉलरशिप दिलाने के नाम पर लाखों लोगों को निशाना बनाने की साजिश का खुलासा, दिल्ली पुलिस ने 2 साइबर ठगों को किया गिरफ्तार

छात्रवृत्ति दिलाने के नाम तमिलनाडु के लोगों से ठगी करने के मामले में दो आरोपी गिरफ्तार

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नई दिल्ली, एजेंसी। दिल्ली पुलिस ने तमिलनाडु के लोगों को निशाना बनाकर की गई छात्रवृत्ति धोखाधड़ी के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने एक मोबाइल फोन भी बरामद किया है, जिसमें शिकायतकर्ता सहित लगभग 54,000 कॉन्टैक्ट्स का डेटा मौजूद है। 

आरोपियों की पहचान सचिन शर्मा और सुमित के रूप में हुई है। दोनों ने कमीशन के बदले एक म्यूल बैंक खाते के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर करने में मदद की। ईस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन ने बैंकिंग रिकॉर्ड, एटीएम सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल सबूतों की जांच करके इस मामले का खुलासा किया।

पुलिस के अनुसार, यह मामला तमिलनाडु के रहने वाले मुथु कुमार की शिकायत से शुरू हुआ। उन्हें उच्च शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप देने का झांसा दिया गया था। स्कॉलरशिप दिलाने के नाम पर 1 सितंबर को उनसे लगभग 17,989 रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए गए।

शिकायतकर्ता ने इस घटना की जानकारी 'नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल' पर दी। जांच के दौरान पैसों का पता लगाते हुए पुलिस 'बैंक ऑफ इंडिया' के एक खाते तक पहुंची, जिससे ईस्ट दिल्ली के एक एटीएम के जरिए पैसे निकाले गए थे। 

पुलिस ने बैंक रिकॉर्ड और एटीएम फुटेज खंगाले, जिससे पता चला कि पैसे निकालने वाला व्यक्ति सचिन था। उसे 17 अक्टूबर को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने कमीशन के बदले अपनी बहन का एटीएम कार्ड और यूपीआई एक्सेस की जानकारी सुमित को दी थी।

सचिन ने 10,000 रुपए निकाले, सुमित द्वारा दी गई यूपीआई डिटेल्स के जरिए 8,000 रुपए ट्रांसफर किए और कमीशन के तौर पर 3,000 रुपए लिए। उसने दावा किया कि उसे नहीं पता था कि यह पैसा साइबर फ्रॉड से जुड़ा है।

उसके खुलासे के आधार पर पुलिस ने 21 अक्टूबर को सुमित को गिरफ्तार किया और एक मोबाइल फोन बरामद किया। डिवाइस की जांच करने पर उसमें व्हाट्सएप के जरिए शेयर की गई एक्सेल फाइलें मिलीं, जिनमें लगभग 54,000 कॉन्टैक्ट्स की जानकारी थी, इनमें शिकायतकर्ता की जानकारी भी शामिल थी।

पुलिस ने बताया कि सुमित ने खुलासा किया कि उसकी जान-पहचान की एक महिला ने 6 अगस्त को ये फाइलें भेजी थीं। वह कथित तौर पर तमिल बोलने वाले उन परिवारों को निशाना बनाती थी, जिनके बच्चों ने स्कूल की पढ़ाई पूरी कर ली थी और उच्च शिक्षा में दाखिला लेना चाहते थे। वह उन्हें स्कॉलरशिप का लालच देकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए उकसाती थी।

सुमित ने दावा किया कि उसे कॉन्टैक्ट डेटाबेस का प्रिंट निकालने और 'ठगी के पैसे' लेने के लिए एक बैंक अकाउंट का इंतजाम करने को कहा गया था। उसने कथित तौर पर वह पैसा उस महिला और उसके एक साथी को सौंप दिया।

महिला और उसके साथियों की भूमिका की जांच चल रही है। पुलिस बरामद डिवाइस की जांच कर रही है ताकि अन्य पीड़ितों, वित्तीय लेन-देन और संदिग्ध नेटवर्क से जुड़े अन्य सुरागों का पता लगाया जा सके।

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