World Rhino Day 2026: गैंडों की अनोखी दुनिया, सबसे शर्मीली प्रजाति 'सुमात्राई' हो रही विलुप्त
जानिए गैंडों की 5 प्रजातियां और उनके सामने मौजूद खतरे
नई दिल्ली (सच कहूँ/एजेंसी)। दुनिया में पाई जाने वाली गैंडों की पांचों प्रजातियों के संरक्षण और उनके अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरों के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 22 सितंबर को विश्व गैंडा दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर भारत में भी एक सींग वाले गैंडे के संरक्षण और उसके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के प्रयासों को रेखांकित किया जा रहा है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने विश्व गैंडा दिवस के अवसर पर भारत के एक सींग वाले गैंडे को देश की वन्यजीव विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। मंत्रालय के अनुसार, गैंडों की संख्या में सुधार संरक्षण उपायों, सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी के संयुक्त प्रयासों को दर्शाता है। बिहार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने भी गैंडे के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। विभाग के अनुसार, गैंडा केवल एक वन्यजीव नहीं है, बल्कि जंगलों, घास के मैदानों और जल स्रोतों के पारिस्थितिक संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पटना जू में गैंडा संरक्षण की पहल
बिहार सरकार ने विश्व गैंडा दिवस के अवसर पर पटना जू में चल रहे संरक्षण कार्यक्रम को भी सामने रखा। विभाग के मुताबिक, यहां एक सींग वाले भारतीय गैंडे के संरक्षण और प्रजनन की पहल वर्ष 1979 से जारी है। समय के साथ यह प्रयास आधुनिक संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र के रूप में विकसित हुआ है, जहां वैज्ञानिक देखभाल और सुरक्षित वातावरण के माध्यम से गैंडों के संरक्षण पर काम किया जा रहा है।
गैंडों की दुनिया में पांच प्रजातियां
दुनिया में गैंडों की कुल पांच प्रमुख प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें कुछ प्रजातियां गंभीर रूप से संकटग्रस्त हैं और इनके सामने अवैध शिकार, सींगों की तस्करी तथा प्राकृतिक आवास के नुकसान जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।
एक सींग वाला गैंडा:
भारतीय एक सींग वाला गैंडा मुख्य रूप से भारत और नेपाल में पाया जाता है। इसे अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की सूची में 'सुभेद्य' श्रेणी में रखा गया है। इसके संरक्षण के लिए प्राकृतिक आवास और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
सफेद गैंडा:
सफेद गैंडे के दो सींग होते हैं और यह अफ्रीका में पाया जाता है। यह अफ्रीका की गैंडों की प्रमुख प्रजातियों में शामिल है और दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया तथा जिम्बाब्वे जैसे देशों में इसकी मौजूदगी है। इसे IUCN की 'निकट संकटग्रस्त' श्रेणी में रखा गया है।
काला गैंडा:
काले गैंडे की पहचान उसके दो सींग और विशिष्ट हुकदार होंठ से होती है। यह पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका में पाया जाता है। IUCN के अनुसार यह 'अति संकटग्रस्त' श्रेणी में है। अवैध शिकार और गैंडे के सींगों के गैरकानूनी कारोबार को इसके लिए बड़ी चुनौती माना जाता है।
जावन गैंडा:
जावन गैंडा एक सींग वाला और दुनिया की सबसे दुर्लभ गैंडा प्रजातियों में से एक है। यह इंडोनेशिया के जावा क्षेत्र में पाया जाता है और IUCN की 'अति संकटग्रस्त' श्रेणी में शामिल है। इस प्रजाति के सींग अपेक्षाकृत छोटे होते हैं और मादा में सींग बहुत छोटा या अनुपस्थित भी हो सकता है।
सुमात्राई गैंडा:
सुमात्राई गैंडे के दो सींग होते हैं, जिनमें आगे वाला अपेक्षाकृत बड़ा होता है। यह आकार में अन्य गैंडा प्रजातियों की तुलना में छोटा और शरीर पर अधिक बालों वाला होता है। इसे भी IUCN की 'अति संकटग्रस्त' श्रेणी में रखा गया है। यह मुख्य रूप से इंडोनेशिया के सुमात्रा और बोर्नियो क्षेत्र में पाया जाता है। इसकी संख्या बेहद कम रह गई है और उपलब्ध जानकारी के अनुसार दुनिया में लगभग 30 से 50 सुमात्राई गैंडे ही बचे हैं। विश्व गैंडा दिवस का उद्देश्य केवल इन वन्यजीवों के बारे में जानकारी देना नहीं, बल्कि उनके आवास, जैव-विविधता और संरक्षण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना भी है।