inspiring story: जानें, एक मोटरसाइकिल मिस्त्री ने कैसे हासिल की पीएचडी की बड़ी उपलब्धि
मिस्त्री से हिंदी शिक्षक तक: प्रदीप कुमार ने हासिल की पीएचडी, गांव में पढ़ा रहे बच्चे
inspiring story: सरसा (सच कहूँ/पवन कुमार)। मंजिल तक पहुंचने के लिए सिर्फ सुविधाएं नहीं, बल्कि हौसला और लगातार मेहनत जरूरी होती है। गांव बनसुधार के प्रदीप कुमार की कहानी इसका उदाहरण है। करीब 10 साल तक मोटरसाइकिल मिस्त्री के रूप में काम करने के साथ उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और हिंदी विषय में पीएचडी की उपाधि हासिल की। आज वही प्रदीप अपने गांव के राजकीय हाई स्कूल में हिंदी शिक्षक के रूप में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। खास बात यह है कि जिस गांव में उन्होंने संघर्ष के दिन देखे, अब वहीं की नई पीढ़ी को शिक्षा देने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। प्रदीप कुमार के पिता हरपाल मास्टर ने भी अपना जीवन शिक्षा के क्षेत्र को समर्पित किया। लंबे समय तक जेबीटी अध्यापक के रूप में सेवाएं देते हुए उन्होंने बच्चों को पढ़ाया। पिता के संस्कारों और शिक्षा के प्रति लगाव को प्रदीप ने भी अपने जीवन का हिस्सा बनाया।
दिन में मिस्त्री का काम, समय मिला तो पढ़ाई
प्रदीप का सफर आसान नहीं रहा। पढ़ाई के साथ उन्होंने करीब एक दशक तक मोटरसाइकिल मिस्त्री का काम किया। दिनभर काम करने के बाद जो समय मिलता, उसमें पढ़ाई करते। आर्थिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने शिक्षा का सिलसिला नहीं टूटने दिया। धीरे-धीरे उन्होंने एमए हिंदी, एमए इतिहास, एमए मनोविज्ञान, एमए समाजशास्त्र, बीएड और एमएड जैसी शैक्षणिक योग्यताएं हासिल कीं। इसके साथ हरियाणा, पंजाब और राजस्थान की पात्रता परीक्षाएं भी उत्तीर्ण कीं। लगातार मेहनत का नतीजा यह रहा कि प्रदीप ने हिंदी विषय में पीएचडी की उपाधि हासिल की। वर्तमान में वह अपने ही गांव के राजकीय हाई स्कूल में टीजीटी हिंदी के पद पर कार्यरत हैं।
एक बेटा सेना में, दूसरा शिक्षा के क्षेत्र में
हरपाल मास्टर के संस्कार उनके दोनों बेटों के जीवन में नजर आते हैं। उनका एक बेटा भारतीय सेना में देश की सेवा कर रहा है, जबकि प्रदीप शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।