हर पशुपालक के लिए जरूरी है ईयर टैग, जानिए इसके बड़े लाभ

हर पशुपालक के लिए जरूरी है ईयर टैग, जानिए इसके बड़े लाभ

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भगत सिंह, चौपटा। आज पशुपालन किसानों की आय बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में हर पशु की सही पहचान और उसका पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखना पहले से अधिक जरूरी हो गया है। इसी उद्देश्य से ईयर टैग व्यवस्था लागू की गई है। यह छोटा-सा टैग पशु को एक स्थायी डिजिटल पहचान प्रदान करता है, जिससे उसके स्वास्थ्य, टीकाकरण, बीमा और अन्य जरूरी जानकारियों का रिकॉर्ड आसानी से सुरक्षित रखा जा सकता है।

कैसे करता है काम: ईयर टैग मजबूत प्लास्टिक या विशेष सामग्री से बनाया जाता है और इसे प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा पशु के कान में लगाया जाता है। इस पर अंकित यूनिक पहचान संख्या पूरे देश में केवल उसी पशु के लिए होती है। इस नंबर के माध्यम से पशु की नस्ल, आयु, टीकाकरण, उपचार और प्रजनन संबंधी जानकारी डिजिटल प्रणाली में दर्ज रहती है। यही कारण है कि इसे पशुओं के ‘आधार’ के रूप में भी देखा जाता है।

बीमा में मिलेगी सुविधा: यदि किसी दुधारू पशु का बीमा कराया गया है, तो ईयर टैग उसकी पहचान का सबसे विश्वसनीय प्रमाण बनता है। बीमारी, दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में बीमा कंपनी आसानी से पुष्टि कर सकती है कि दावा उसी पशु से जुड़ा है। इससे क्लेम प्रक्रिया तेज होती है, पारदर्शिता बनी रहती है और फर्जी दावों की संभावना काफी कम हो जाती है। 

खोए पशु की पहचान: कई बार पशु चरते समय भटक जाते हैं या चोरी हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में ईयर टैग मालिक तक पहुंचने का सबसे आसान माध्यम बन जाता है। यदि पशु किसी अन्य गांव या जिले में मिलता है, तो उसके कान में लगे यूनिक नंबर के आधार पर उसकी पहचान कर मालिक से संपर्क किया जा सकता है। इससे पशुओं की चोरी पर नियंत्रण रखने और उन्हें वापस दिलाने में भी मदद मिलती है।
सरकारी योजनाओं का लाभ: केंद्र और राज्य सरकारें समय-समय पर पशुपालकों के लिए बीमा, टीकाकरण, नस्ल सुधार, सब्सिडी और पशुधन विकास जैसी कई योजनाएं संचालित करती हैं। इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए पशुओं का पंजीकरण आवश्यक होता है। ईयर टैग लगे होने पर पशु की पहचान पहले से दर्ज रहती है, जिससे आवेदन प्रक्रिया आसान हो जाती है और सरकारी सहायता सही लाभार्थियों तक पहुंचाने में सुविधा मिलती है। 

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