बाढ़ राहत कार्यों में बरती जा रही अनियमितता काम की गुणवत्ता पर पड़ेगा असर

सिंचाई विभाग के कार्यों पर सवाल, पत्थर स्टॉक में गड़बड़ी का आरोप

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प्रताप नगर (सच कहूँ/राजेंद्र कुमार)। Pratap Nagar News: सिंचाई विभाग द्वारा जिले को बाढ़ की विभीषिका से बचाने के लिए करोड़ो का बजट जारी किया है। इसके लिए सिंचाई विभाग द्वारा लगभग 30 साइटों के लिए टेंडर जारी किया था जिनका काम 16 अप्रैल से शुरू कर दिया गया है लेकिन शुरुआत से ही सिंचाई विभाग द्वारा काम में लापरवाही बरती जा रही है। सरकारी अधिकारियों से मिलीभगत के चलते एजेंसियां काम में लापरवाही बरत रही है। Pratap Nagar News

हालांकि कई जगह साइटों पर एजेंसियों ने पत्थर का स्टॉक लगाना शुरू कर दिया है और यही पत्थर आगे चलकर बाढ़ राहत कार्यों में प्रयोग किया जाएगा लेकिन भ्रष्टाचार और मिलीभगत का खेल यही से शुरू किया जा रहा है। साइटों पर कई जगह छोटे पत्थर स्टेक के अंदर लगाए जा रहे हैं और स्टेक को पैमाईश के हिसाब से तैयार किया जा रहा है लेकिन पत्थरों की कमी वाला यही स्टेक बाढ़ राहत कार्यों की गुणवत्ता पर प्रभाव डालेगा।

वहीं किसानों ने आरोप लगाया है कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से कार्यों में भारी अनियमितताएं अभी से बरती जा रही हैं और यही अनियमितता कार्य की गुणवत्ता पर असर डालेगी जिससे बाढ़ सुरक्षा के लिए किए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। किसान सुमेर चंद,राकेश कुमार,रजनीश,अमित कुमार आदि का कहना है कि पिछले वर्ष भी सिंचाई विभाग ने बाढ़ से सुरक्षा के दावे किए थे लेकिन बाढ़ की विभीषिका दर्जनों गांवों के सैकड़ो ग्रामीणों को भुगतनी पड़ी थी। कई जगह पर तो सिंचाई विभाग के कार्य शुरू ही नहीं हो पाए थे और जहां पर शूर हुए वहां भी आधे अधूरे कार्य ही सिंचाई विभाग ने करवाए जिनकी आज तक पेमेंट भी जारी नहीं की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि सिंचाई विभाग द्वारा हर साल बाढ़ राहत कार्यों में करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं लेकिन नतीजा वही बाढ़ का दंश लोगो को भुगतना ही पड़ता है। ठेकेदार के द्वारा बाढ़ राहत कार्य में लगाई जाने वाले पत्थरों के स्टॉक में मिट्टी मिक्स करके स्टेक को बनाया जा रहा है जिससे पत्थर की पैमाइश में काफी अंतर आएगा जिसका सीधा नुकसान उनके खेतों में लगाए जाने वाले स्टड व अन्य कार्यों पर पड़ेगा। ठेकेदार के द्वारा पत्थर के साथ मिट्टी को मिक्स करके पत्थरों के चट्टे  लगाए जा रहे हैं ताकि कम पत्थर में पूरी पैमाइश हो सके।

इसके साथ-साथ स्टॉक लगाने वाली जगह को विजिलेंस टीम द्वारा भी सभी प्रकार से देखा  नहीं गया है जहां पर पत्थर गिराया जा रहा है जबकि पहले विजिलेंस की टीम पत्थर का स्टॉक लगाने वाली जगह का मुआयना करेगी तभी स्टॉक लगेगा लेकिन विजिलेंस की टीम की देखरेख के बिना ही स्टॉक ऊबड़ खाबड़ जगह में लगा दिया गया है। जिस जगह पर स्टॉक लगाया गया है वह जगह उबड़ खाबड़ है जिससे पत्थर की पैमाइश में काफी अंतर आएगा। इस सारे कार्य में अधिकारियों में ठेकेदार की मिलीभगत नजर आ रही है।

मुजाफ़त कला, भगेड़ी,बागपत आदि ऐसी कई जगह है जहां पर पत्थर तो स्टॉक कर लिए लेकिन पत्थर में अधिकतर मिट्टी ही मिलाई जा रही है। इसके अलावा सिंचाई विभाग द्वारा रंजीतपुर,रामपुर,भगवानपुर, तिहानों,खानू वाला, नगली 32 में भी बाढ़ राहत के करवाए जाने है।

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