विधान सभा परिसर में लहलाएंगे औषधीय और नक्षत्रों से संबंधित पौधें

5 मई को दोनों वाटिकाओं का होगा उ‌द्घाटन

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जयपुर (सच कहूं न्यूज)। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. वासुदेव देवनानी की एक और पहल से विधान सभा परिसर में नक्षत्र वाटिका और हर्बल वाटिका का अभिनव सृजन किया जा रहा है। यह वाटिकाएं भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, प्राचीन ज्योतिषीय जान, आयुर्वेद चिकित्सा और पर्यावरण संरक्षण के समन्वय का सजीव उदाहरण बनेगी। इन वाटिकाओ का उ‌द्घाटन डॉ. देवनानी 5 राज्यों के स्पीकर्स के साथ 5 मई को प्रातः 10 बजे करेंगे। राजस्थान विधान सभा में इस नवाचार के मध्य प्रदेश, उत्तरप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम विधान सभा के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, सतीश महाना, कुलदीप सिंह पठानिया, सूरमा पाढी और मिगमा नाबू साक्षी बनेंगे। इस मौके पर संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी मौजूद रहेंगे।

नक्षत्र वाटिका में होंगे 27 नक्षत्रों के पौधे

नक्षत्र वाटिका की अवधारणा भारतीय ज्योतिष के 27 नक्षत्रों  पर आधारित है। ज्योतिष में प्रत्येक नक्षत्र का संबंध एक विशिष्ट वृक्ष से माना गया है। इसके लिए विधान सभा के दक्षिण भाग में दोनों पार्किंग के मध्य पांच हजार वर्ग मीटर अर्ध चन्द्राकार उद्यान विकसित किया गया है। इस वाटिका में 27 नक्षत्रों से संबंधित प्रमुख वृक्षों क्रमशः कुचला, आंवला, गूलर, जामून, खैर, शीशम, बांस, पीपल, नागकेसर, बरगद/बट, पलाश, पाकड, रीठा/चमेली, बेल, अर्जुन, कटारी, मौलश्री, चीड/संभल, साल, जलवेतर/अशोक, कटहल, शमी/आक, मदार/शमी, कदंब, आम, नीम, महुआ का रोपण किया जा रहा है।  

हर्बल वाटिका में होंगे 38 औषधीय पौधे

विधान सभा परिसर में आठ सौ पचास वर्ग मीटर में हर्बल वाटिका भी विशेष रूप से विकसित की गई है। इसके लिए विधान सभा के उत्तर पश्चिम क्षेत्र में 8*13 फीट की सुव्यवस्थित 38 क्यारियों 38 क्यारियों में 38 प्रजातियों के पौधे लगाये जा रहे है। प्रत्येक क्यारी में एक प्रजाति के 20 से 25 पौधों का रोपण किया जा रहा है। औषधीय पौधों में रोजमेरी, लौंग, समुद्र बेल, अजवाइन, बैजंती, पेपर-मिन्ट, पचोली, इंसुलिन, मेहंदी, पत्थर च‌ट्टा, ओडोमास, केशवर्धनी, अश्वगंधा, सिट्रोनेला, कालमेघ, अग्रिमन्थ, हटजोड, ऐलोविरा (ग्वारपाटा), लेमनग्रास, वेटिवर ग्रास (खस), वेखंड (स्वीट फ्लैग), तुलसी, इलायची, पिपली, कपूर, गुज, दन्ती, मरवा, अक्कड काडा, स्टीविया, अजावृक्ष, सतावरी, रतनजोत. निरगुडी, रेड अडुसा (लाल वासा), सर्पगंधा, पान या नागरबेल और ब्रहमी शामिल है। Rajasthan News

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