Visa Fraud: कनाडा वर्क परमिट दिलाने के नाम पर 63.60 लाख की ठगी

कैथल पुलिस ने मोहाली से आरोपी गिरफ्तार किया

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कैथल (सच कहूँ/हि.स.)। विदेश भेजने और कनाडा का वर्क परमिट दिलवाने का झांसा देकर लाखों रुपये लेने के मामले में कैथल पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। एंटी इमिग्रेशन सेल की कार्रवाई में पकड़े गए आरोपी की पहचान मोहाली निवासी ऋषभ के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर एक दिन का रिमांड प्राप्त किया है। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका और पैसों के लेन-देन की जांच जारी है।

पुलिस के अनुसार, गांव हाबड़ी निवासी सिमरनजीत सिंह ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि वह खेतीबाड़ी करता है। वह करीब सात साल कनाडा में पढ़ाई करने के बाद मार्च 2025 में भारत लौटा था। परिवार के साथ दोबारा कनाडा जाने की योजना के तहत वह कंस्ट्रक्शन सुपरवाइजर के पद पर वर्क परमिट हासिल करना चाहता था। इसी दौरान उसे सोशल मीडिया पर चंडीगढ़ की ग्रे इमिग्रेशन लॉ फर्म का विज्ञापन दिखाई दिया। शिकायतकर्ता ने विज्ञापन के जरिए संपर्क किया तो कुछ लोगों ने खुद को इमिग्रेशन प्रक्रिया के जानकार बताते हुए परिवार सहित कनाडा भेजने का भरोसा दिया।

कनाडा भेजने के लिए प्रति व्यक्ति 30 लाख रुपये मांगे

शिकायत में प्रदीप कुमार, गुरदीप सिंह, ऋषभ और रमित कुमार सहित अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि अक्टूबर 2025 में प्रदीप कुमार और गुरदीप सिंह ने शिकायतकर्ता को कैथल बाईपास के पास पुंडरी-कैथल रोड पर बुलाया। वहां कनाडा भेजने की प्रक्रिया के लिए प्रति व्यक्ति लगभग 30 लाख रुपये की मांग की गई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने आरोपियों को नकदी के साथ पासपोर्ट और जरूरी दस्तावेज सौंप दिए। शिकायत के मुताबिक, वीजा फीस, एंबेसी फीस, वर्क परमिट, फाइल चार्ज और अन्य प्रक्रियाओं का हवाला देकर अलग-अलग समय पर भुगतान करवाया गया।

भाई और गांव के अन्य परिवारों को भी विदेश भेजने का भरोसा

शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपियों ने उसके भाई बेअंत सिंह तथा गांव के गुरशरण सिंह और निहाल सिंह के परिवारों को भी कनाडा भेजने का भरोसा दिया। इस सिलसिले में उनके पासपोर्ट और दस्तावेज लिए गए। आरोपियों ने प्राइम इमिग्रेशन सर्विस के माध्यम से प्रक्रिया पूरी करवाने की बात कही। शिकायत के अनुसार, इस फर्म के कार्यालय में भी विभिन्न शुल्कों के नाम पर रकम जमा करवाई गई।

कई महीनों तक हुआ भुगतान, फिर भी नहीं मिला वीजा

शिकायत में बताया गया कि अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 तक अलग-अलग बैंक खातों और ऑनलाइन माध्यमों के साथ नकद भी भुगतान किया गया। फरवरी के आखिरी दिनों में शिकायतकर्ता अपने भाई और एक अन्य व्यक्ति के साथ चंडीगढ़ स्थित प्राइम इमिग्रेशन सर्विस के कार्यालय पहुंचा। वहां अंतिम भुगतान के तौर पर 10 लाख रुपये नकद दिए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता के अनुसार, पूरी प्रक्रिया के दौरान करीब 63 लाख 60 हजार रुपये दिए गए, लेकिन कनाडा का वीजा या वर्क परमिट जारी नहीं हुआ। इसके बाद उसने पुलिस से संपर्क कर कार्रवाई की मांग की।

एंटी इमिग्रेशन सेल कर रही मामले की जांच

इस शिकायत के आधार पर थाना पूंडरी में मामला दर्ज किया गया था। जांच एंटी इमिग्रेशन सेल प्रभारी पीएसआई अमन के नेतृत्व में एएसआई जसबीर सिंह कर रहे थे। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मोहाली निवासी ऋषभ को गिरफ्तार कर लिया है। अदालत से एक दिन का रिमांड मिलने के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले में पैसों के लेन-देन, दस्तावेजों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

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