स्वर्णजीत की जगह जलाई गई लाश किसकी थी, डीएनए रिपोर्ट के बाद छह साल पुराने मामले में उठा सवाल

स्वर्णजीत की जगह जलाई गई लाश किसकी थी, डीएनए रिपोर्ट के बाद छह साल पुराने मामले में उठा सवाल

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अंबाला,  (सच कहूँ न्यूज़)  छह साल पहले जिस मामले में चार लोग हत्या के आरोपी बनाए गए, उसकी बुनियाद पर अब डीएनए रिपोर्ट ने सवाल खड़ा कर दिया है। आरोपी जरनैल सिंह के वकील तरुण दत्ता और सुखप्रीत सिंह के मुताबिक, बोह गांव के स्वर्णजीत सिंह की लाश बताकर जिस शव का अंतिम संस्कार हुआ, उसका डीएनए स्वर्णजीत के पिता और मां, दोनों से मेल नहीं खाया। अंबाला छावनी के इस गांव से स्वर्णजीत जनवरी 2020 में लापता हुआ था।  वकीलों ने बताया कि पुलिस ने लाश और स्वर्णजीत के पिता के नमूने मधुबन स्थित फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजे थे, जहां दोनों का डीएनए मेल नहीं खाया। शिकायतकर्ता ने फिर अदालत में आवेदन देकर मां के नमूने से मिलान की मांग की। अधिवक्ता के मुताबिक, अदालत ने आवेदन स्वीकार किया और 2025 में मां का नमूना लिया गया। अब आई रिपोर्ट में भी मां का डीएनए लाश से मेल नहीं खाया।

  मामले की शुरुआत 27 जनवरी 2020 को हुई। पुलिस में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, बोह गांव निवासी करीब 40 वर्षीय स्वर्णजीत गाड़ी चलाने का काम करता था। वह दोपहर करीब 12.30 बजे अपनी टाटा जेस्ट कार लेकर घर से निकला और वापस नहीं लौटा। पिता दिलीप सिंह ने तलाश की, पर कोई पता नहीं चला। महेश नगर थाने में 31 जनवरी 2020 को प्राथमिकी संख्या 44 दर्ज हुई। पुलिस ने पहले भारतीय दंड संहिता की धारा 346 में मामला दर्ज किया, बाद में हत्या समेत अन्य धाराएं जोड़ी गईं। इस बीच 30 जनवरी 2020 को पुलिस को एक अधजली लाश मिली थी। परिवार को बुलाकर पहचान कराई गई तो परिजनों ने उसे स्वर्णजीत का शव बताया। इसके बाद पुलिस ने चार लोगों को हत्या के मामले में आरोपी बनाया।

अधिवक्ता तरुण दत्ता के अनुसार, एक आरोपी की सुनवाई के दौरान जेल में मौत हो गई। उनके मुवक्किल जरनैल सिंह करीब ढाई साल जेल में रहे और बाद में हाईकोर्ट से जमानत मिली। बाकी आरोपियों को भी जमानत मिल चुकी है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में 20 जुलाई 2020 को आरोपी उमेश गर्ग की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई थी। अदालती आदेश के मुताबिक, उमेश को मृतक की कार सह-आरोपी जरनैल सिंह से खरीदने के आरोप में शामिल किया गया था। अदालत ने मुकदमे में लगने वाले समय और कोविड-19 से बनी परिस्थितियों को देखते हुए उसे नियमित जमानत दी थी।

डीएनए रिपोर्ट के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि स्वर्णजीत जीवित है या उसके साथ क्या हुआ। लाश किसकी थी और स्वर्णजीत कहां है, यह अब भी साफ नहीं है। आगे की जांच और अदालती कार्यवाही के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। तरुण दत्ता ने कहा कि डीएनए रिपोर्ट के बाद वह अपने मुवक्किल की ओर से हाईकोर्ट में केस रद्द कराने के लिए याचिका दायर करेंगे। उनके अनुसार, इसके बाद अदालत के आदेश के मुताबिक शिकायतकर्ता और पुलिस के खिलाफ मुआवजे की कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।

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