हर सरकारी स्कूल को लेना पड़ रहा नशों के खिलाफ मुहिम में भाग

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नशेड़ियों को बचाने के चक्कर में विद्यार्थियों का भविष्य खतरे में

स्कूल के विद्यार्थियों को हर सप्ताह सैमीनार से लेकर मैराथन दौड़ में किया जाता है शामिल

चंडीगढ़(अशवनी चावला)।

पंजाब के नशेड़ियों को बचाने के चक्कर में सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों का भविष्य ही खतरे में नजर आ रहा है, क्योंकि हर सप्ताह अध्यापकों सहित विद्यार्थियों को नशों के खिलाफ मुहिम में भाग लेने के लिए कभी सेमीनार तो कभी मैराथन सहित हर समारोहों के लिए बुलाया जा रहा है जिस कारण पंजाब सरकार की ओर से चलाई जा रही नशों के खिलाफ मुहिम से शिक्षा विभाग काफी अधिक परेशान होता नजर आ रहा है, क्योंकि इस मुहिम के लिए बीडीपीओ से लेकर एसडीएम व तहसीलदार से लेकर डिप्टी कमिशनर कोई भी सेमीनार करवाते हैं या फिर मैराथन दौड़ करवाते हैं तो सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों सहित अध्यापकों को न सिर्फ दौड़ना पड़ रहा है, बल्कि कई कई घंटो के सेमीनार को सुनना तक पड़ रहा है। पिछले सप्ताह तो डिप्टी कमिशनर मानसा ने सभी गांवों में स्थित स्कूलों के विद्यार्थियों को शहर बुलाकर मैराथन दौड़ तक करवाई।

जिसे लेकर शिक्षा विभाग ने काफी अधिक आपत्ति जताई, क्योंकि विद्यार्थियों को कई-कई किलोमीटर से बसों से सफर करते हुए न सिर्फ शहर में आना पड़ा था, बल्कि उनकी पढ़ाई तक खराब हुई है। शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों की ओर से इस संबंधी पंजाब सरकार तक अपनी आवाज तक पहुंचा दी है कि नशों के खिलाफ मुहिम से अध्यापकों व विद्यार्थियों को बाहर निकालना होगा और यदि इस तरह नहीं किया तो नशेड़िÞयों को बचाते-बचाते खुद विद्यार्थियों का भविष्य खराब हो सकता है, क्योंकि स्कूलों में नशो की मुहिम कर पढ़ाई बहुत ही अधिक कम हो पा रही है और जिस कारण परीक्षा दौरान परिणाम भी काफी अधिक खराब आने के भी आसार बन रहे हैं।

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