पूज्य गुरु जी के आह्वान पर डेरा सच्चा सौदा ने शुरू किया थैलेसीमिया पीड़ितों के लिए विशेष अभियान

अब जरूरत पड़ते ही पहुंचेगा खून, थैलेसीमिया के मरीजों को मिलेगा नियमित रक्त, देश-विदेशों में बनेंगी रक्तदाता टीमें

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Thalassemia Patients Special Campaign: सरसा/पटियाला (सच कहूँ/खुशवीर तूर)। थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए विश्व रक्तदाता दिवस (World Blood Donor Day 2026) इस बार उम्मीद की नई किरण लेकर आया। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh JI Insan) के आह्वान पर सर्वधर्म संगम डेरा सच्चा सौदा ने देशभर व विदेशों में थैलेसीमिया पीड़ित मरीजों को नियमित रक्त उपलब्ध करवाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।

इस पहल के तहत साध-संगत ऐसे मरीजों को जरूरत के अनुसार समय-समय पर रक्तदान करेगी, ताकि किसी भी मरीज को रक्त की कमी के कारण परेशान न होना पड़े। अभियान की शुरूआत रविवार को पंजाब के पटियाला स्थित एमएसजी डेरा सच्चा सौदा एवं मानवता भलाई केंद्र शाह सतनाम जी नुरानी धाम तथा शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल में स्थापित पूज्य बापू मग्घर सिंह जी इंटरनेशनल ब्लड सेंटर में आयोजित विशेष रक्तदान शिविरों से हुई। 

पटियाला में साध-संगत ने किया 304 यूनिट रक्तदान 

पटियाला में 304 यूनिट रक्तदान हुआ। शिविरों में बड़ी संख्या में सेवादारों ने रक्तदान कर इस मुहिम का समर्थन किया। उल्लेखनीय है कि डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत अब तक 33 लाख यूनिट से अधिक रक्तदान कर मानवता सेवा के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान बना चुकी है। इस अवसर पर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने रक्तदान को मानवता की सबसे बड़ी सेवा बताते हुए कहा कि थैलेसीमिया जैसी बीमारी से पीड़ित मरीजों को जीवनभर नियमित रक्त की आवश्यकता होती है। कई बार समय पर रक्त नहीं मिलने के कारण मरीजों और उनके परिवारों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

ऐसे में डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत उनके लिए संबल बनेगी और जरूरत पड़ने पर तत्काल रक्त उपलब्ध करवाएगी। पूज्य गुरु जी ने साध-संगत से आह्वान किया कि वे थैलेसीमिया पीड़ित मरीजों की केवल रक्तदाता के रूप में नहीं, बल्कि संरक्षक और परिवार के सदस्य की तरह मदद करें। उनकी देखभाल और सहयोग इस प्रकार किया जाए कि मरीजों को कभी अकेलापन महसूस न हो। उन्हें यह एहसास हो कि साध-संगत ने उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानकर उनकी हर जरूरत और रक्त की आवश्यकता की जिम्मेदारी उठा कर एक तरह से गोद ही ले लिया है तथा पूरा डेरा परिवार हर समय उनके साथ खड़ा है।

आप जी ने फरमाया कि इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक क्षेत्र में साध-संगत की अलग-अलग रक्तदाता टीमें गठित की जाएंगी। ये टीमें अपने क्षेत्र के थैलेसीमिया मरीजों का डाटा तैयार कर नियमित रूप से उनके संपर्क में रहेंगी। जब भी किसी मरीज को रक्त की आवश्यकता होगी, टीम के सदस्य तुरंत रक्तदाताओं की व्यवस्था कर मदद पहुंचाएंगे। इससे मरीजों को रक्त के लिए अस्पतालों और ब्लड सेंटरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे तथा समय पर उपचार सुनिश्चित हो सकेगा। पूज्य गुरु जी ने साध-संगत से आह्वान किया कि वे नियमित रक्तदान को सेवा का हिस्सा बनाएं और टीम बनाकर निरंतर इस अभियान से जुड़े रहें। उन्होंने कहा कि यदि समाज संगठित होकर आगे आए तो कोई भी मरीज रक्त के अभाव में परेशान नहीं होगा।

हजारों मरीजों को मिलेगा लाभ

नई पहल को लेकर साध-संगत में खासा उत्साह देखने को मिला। रक्तदान शिविरों में युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ सेवादारों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। सेवादारों ने भविष्य में भी नियमित रूप से रक्तदान करने और थैलेसीमिया मरीजों की जिम्मेदारी उठाने का संकल्प लिया। थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त रोग है, जिसमें मरीजों को निश्चित अंतराल पर रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में नियमित रक्त उपलब्ध कराने की यह पहल हजारों मरीजों को राहत देगी। सामाजिक सरोकार और स्वास्थ्य सेवा को जोड़ने वाली इस मुहिम को मानवता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे देशभर के थैलेसीमिया मरीजों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

पूज्य गुरु जी ने ली थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की सुध: डॉ. सुखविन्द्र सिंह

राजेन्द्रा अस्पताल ब्लड बैंक से पहुंचे डॉ. सुखविन्द्र सिंह ने कहा कि वे डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालुओं से बहुत प्रभावित हैं। कुछ ही समय में इन्होंने ब्लड बैंक का कोटा पूरा कर दिया। उन्होंने बताया कि राजेन्द्रा अस्पताल में 42 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे हैं, जिनके लिए ये डेरा श्रद्धालु जिंदगी बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरु जी ने इन बच्चों की सुध लेते हुए भविष्य में रक्त की कमी न आने देने का विश्वास दिलाया है। डॉ. अमरदीप सिंह ने कहा कि शिविर बहुत अनुशासित और उत्साहपूर्ण था तथा डेरा श्रद्धालुओं जैसा सेवा भाव कहीं और देखने को नहीं मिलता।

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