Haryana: हरियाणा में करोड़ों के बाढ़ सुरक्षा प्रोजेक्ट अधूरे, मानसून से पहले काम पूरा होने पर सवाल
Haryana: बरसात से पहले सुरक्षा इंतजाम अधूरे, करोड़ों की परियोजनाओं की रफ्तार धीमी
Haryana: प्रताप नगर, सच कहूं राजेंद्र कुमार। क्षेत्र में सिंचाई विभाग द्वारा शुरू किए गए 38 जगहों पर करोड़ों की लागत से बाढ़ राहत कार्यों की धीमी गति अब ग्रामीणों की चिंता का कारण बनने लगी है। हालांकि विभागीय अधिकारियों के अनुसार लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। लेकिन कई जगहों पर अभी तक कार्य शुरू ही नहीं हो पाया है। विभाग द्वारा विभिन्न स्थानों पर शुरू किए गए कार्यों में अभी तक लगभग 70 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है, जबकि कई संवेदनशील क्षेत्रों में कार्य अभी शुरू तक नहीं हो सके हैं। सभी कार्यों को पूरा करने की अंतिम तिथि 30 जून निर्धारित की गई है, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए समय सीमा के भीतर सभी परियोजनाओं के पूरा होते नजर नहीं आ रहे हैं।
क्षेत्र में प्री-मानसून की दस्तक के साथ ही ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। पिछले दिनों हुई तेज बरसात से यमुनानदी में जल स्तर बढ़ गया था जिससे यमुना के साथ लगते गावो के ग्रामीणों की सांसे अटक गई। जिन गांवों में बाढ़ राहत कार्य अधूरे हैं या अभी तक शुरू नहीं हुए हैं, वहां के लोग संभावित बाढ़ और कटाव के खतरे को लेकर आशंकित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्य पूरे नहीं हुए तो बरसात के दौरान नदियों और नालों में जलस्तर बढ़ने से कई गांवों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।जानकारी के अनुसार सिंचाई विभाग द्वारा विभिन्न गांवों में स्टड, तटबंधों की मजबूती, पत्थर लगाने तथा कटाव रोकने के लिए जाल लगाने जैसे कार्य किए जा रहे हैं। हालांकि कई स्थानों पर अभी भी पत्थर लगाने का काम अधूरा है, जबकि कुछ जगहों पर निर्माण सामग्री पहुंचने के बावजूद कार्य में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई दे रही। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होने से पहले ऐसे कार्यों का पूरा होना बेहद जरूरी है ताकि बाढ़ और भूमि कटाव से बचाव किया जा सके।
इस बीच विभाग द्वारा करवाए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बाढ़ राहत कार्यों में मानकों के अनुरूप सामग्री का प्रयोग नहीं किया जा रहा। उनका कहना है कि कई स्थानों पर मिट्टी युक्त तथा छोटे आकार के पत्थरों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि तकनीकी मानकों के अनुसार मजबूत और बड़े पत्थरों का प्रयोग होना चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि घटिया सामग्री का उपयोग किया गया तो तेज बहाव के दौरान यह संरचनाएं टिक नहीं पाएंगी और सरकारी धन का भी नुकसान होगा। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि जिन जालों में पत्थर भरकर लगाए जा रहे हैं, उन्हें बांधने के लिए उपयोग की जा रही तारों में पहले से ही जंग लगी हुई है। उनका कहना है कि जंग लगी तार बरसात और पानी के लगातार संपर्क में आने पर जल्दी खराब हो सकती है, जिससे पूरे ढांचे की मजबूती प्रभावित हो सकती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि विभाग इन आरोपों की निष्पक्ष जांच करवाए और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप सामग्री का उपयोग सुनिश्चित करे। क्षेत्र के कई ग्रामीणों सुभाष राणा, मोहन राणा, बीरमपाल सिंह, दीपक चौहान, धर्मवीर सिंह, रामू, जसबीर सिंह आदि
का कहना है कि पिछले वर्षों में भी बरसात के दौरान टापू,कमालपुर, लापरा,ओदरी आदि कई गांवों में कटाव और जलभराव की समस्याएं सामने आती रही हैं। ऐसे में इस बार समय रहते बाढ़ राहत कार्यों को पूरा करना और उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। जबकि मंडोली,टापू और पोबारी में अभी तक कार्य शुरू ही नहीं हुआ जबकि पिछले सीजन में सबसे अधिक यमुना का कटाव और नुकसान यही पर हुआ था। ग्रामीणों का मानना है कि यदि कार्यों में लापरवाही बरती गई तो बरसात के दौरान खेतों, सड़कों और आबादी वाले क्षेत्रों को नुकसान पहुंच सकता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि भगेडी,बागपत, मुजाफत कला,आदि कई ऐसी जगह है जहां पर पत्थरों में मिट्टी मिलाई जा रही है और छोटे पत्थरों का प्रयोग किया गया है। इसके साथ ही जाल बांधने में जंग लगी तार का प्रयोग किया जा रहा है। इससे कार्य की मजबूती और गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। जिस जगह पर ये जाल लगाए जा रहे हैं वहां बाढ़ के पानी का बहाव अधिक रहता है जिससे ये जाल अधिक समय तक नहीं टिक पाएंगे। इस बारे में सिंचाई विभाग के एक्सईएन राहिल सैनी ने बताया कि एक ही एजेंसी पर अधिक कार्य अलॉट होने से कार्य में थोड़ी दिक्कत आ रही है। अधिकतर साइटों पर कार्य पूरे हो चुके है। एजेंसी को साफ निर्देश दिए गए है कि अति संवेदनशील साइटों पर काम जल्द से शुरू किया जाए