सदी की दहलीज पर सैनिक शौर्य की मिसाल: लेफ्टिनेंट कर्नल

1948 में सेना में कमीशन, फिर कई अहम जिम्मेदारियां

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जयपुर (सच कहूँ न्यूज़)। राजस्थान के नीम का थाना क्षेत्र के पुराना बास गांव में जन्मे लेफ्टिनेंट कर्नल रामजीलाल कृष्णिया (सेवानिवृत्त) का जीवन भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का परिचायक है। 04 अक्टूबर 1926 को जन्मे कृष्णिया ने लगभग तीन दशकों के सैन्य जीवन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं और कई ऐतिहासिक सैन्य अभियानों के साक्षी रहे।

लेफ्टिनेंट कर्नल कृष्णिया का जन्म एक सैनिक परिवार में हुआ। उनके पिता सूबेदार मेजर शेडू राम (स्वर्गीय) 4 राजपूताना राइफल्स में सेवारत थे। उन्होंने प्रथम एवं द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान क्रमशः मध्य पूर्व और बर्मा में युद्ध किया था। उनके बड़े भाई मेजर शिव सिंह भी बाद में उसी बटालियन में कमीशन प्राप्त कर सेना में शामिल हुए।

वर्ष 1946 में कृष्णिया ने एसएसबी, रावलपिंडी से भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून के तीसरे बैच के लिए चयन प्राप्त किया। वर्ष 1948 में आईएमए, देहरादून से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें 1 बिहार रेजिमेंट की प्रथम बटालियन में कमीशन मिला। इसी वर्ष बटालियन को हैदराबाद में ऑपरेशन पोलो के लिए रवाना किया गया।

इसके बाद कृष्णिया को चार वर्षों के लिए कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस में नियुक्त किया गया। बिहार रेजिमेंटल सेंटर में नियुक्ति के दौरान उन्हें 01 जनवरी 1963 को 5 बिहार रेजिमेंट की स्थापना की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने अगले दस माह तक 5 बिहार के प्रथम कमांडिंग ऑफिसर के रूप में कार्यवाहक दायित्व भी संभाला।

लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्हें 8 बिहार रेजिमेंट के रेजिंग-इन-चार्ज तथा प्रथम कमांडिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी मिली। उनके नेतृत्व में बटालियन को भूटान में तैनात किया गया। इसके बाद 1971 के युद्ध के प्रारंभ में बटालियन को पूर्वी पाकिस्तान की सीमा पर ले जाया गया।

बटालियन से स्थानांतरण के बाद कृष्णिया ने आगरा स्थित युद्धबंदी शिविर की कमान संभाली। बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान इस शिविर में पूर्वी पाकिस्तान के 10,000 से अधिक युद्धबंदियों को रखा गया था।वर्ष 1976 में, लगभग तीन दशकों के सैन्य जीवन के बाद, लेफ्टिनेंट कर्नल आर. एल. कृष्णिया सेवानिवृत्त हुए। सैन्य सेवा से निवृत्ति के बाद भी समाज के प्रति उनका जुड़ाव बना रहा। वर्तमान में वे जयपुर में निवास करते हैं और समाजसेवा एवं परोपकार के कार्यों में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।

लगभग एक सदी की जीवन यात्रा पूरी कर चुके लेफ्टिनेंट कर्नल कृष्णिया के सैन्य जीवन में युद्ध, नेतृत्व और संगठन निर्माण के कई महत्वपूर्ण अध्याय शामिल हैं। 1 बिहार से लेकर 5 बिहार और 8 बिहार तक उनकी सैन्य यात्रा कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से जुड़ी रही। आज भी उनका जीवन बिहार रेजिमेंट के आदर्श वाक्य “कर्म ही धर्म” को चरितार्थ करता है। उनका सैन्य जीवन और उसके बाद की सामाजिक सक्रियता कर्तव्य एवं सेवा के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता की मिसाल है।

R-L-Krishnia

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