Rajasthan High Court: निर्दलीय विधायक रितु बनावत की याचिका को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! लगाया 1 लाख का जुर्माना
कोर्ट ने कहा कि लगाए गए आरोप चुनावी जनादेश को अमान्य करने के लिए पर्याप्त नहीं थे
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने बयाना की निर्दलीय विधायक रितु बनावत के चुनाव को रद्द करने की मांग वाली चुनाव याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि लगाए गए आरोप चुनावी जनादेश को अमान्य करने के लिए पर्याप्त नहीं थे। कोर्ट ने विधायक रितु बनावत पर कोर्ट के समन (बुलावा) से जानबूझकर बचने की कोशिश करने के लिए एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह आदेश जस्टिस सुदेश बंसल ने 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनावों में बयाना विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार पुरुषोत्तम लाल की याचिका पर दिया। Rajasthan High Court
हाईकोर्ट ने कार्यवाही के दौरान विधायक रितु बनावत के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि उन्होंने कोर्ट के समन लेने से बचने के लिए "जानबूझकर और सोच-समझकर" कई तरीके अपनाए। कोर्ट ने गौर किया कि नोटिस तामील कराने की बार-बार की गई कोशिशें नाकाम रहीं, जिससे हाईकोर्ट को राजस्थान विधानसभा के सचिव के जरिए नोटिस तामील कराने का दूसरा तरीका अपनाना पड़ा।
इस व्यवहार को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने विधायक पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। चुनाव याचिका में आरोप लगाया गया था कि रितु बनावत 2023 के विधानसभा चुनावों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करते समय अपनी संपत्ति और देनदारियों के बारे में पूरी और सही जानकारी देने में नाकाम रही थीं।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि जिन जानकारियों को नहीं बताया गया, वे चुनाव कानून के तहत भ्रष्ट आचरण के दायरे में आती हैं और इसके आधार पर उनका चुनाव रद्द किया जाना चाहिए। याचिका के अनुसार, पुरुषोत्तम लाल को 689 वोट मिले जबकि रितु बनावत ने एक लाख से ज्यादा वोट हासिल करके बयाना सीट जीती। Rajasthan High Court
बनावत की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट आरएन माथुर ने तर्क दिया कि कानून के तहत जरूरी सभी अहम जानकारियां सही ढंग से बताई गई थीं। उन्होंने कहा कि चुनाव खर्च के लिए खास तौर पर खोले गए बैंक खाते की जानकारी देना कानूनी रूप से जरूरी नहीं था। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि एक गृहिणी भी वैध तरीके से खेती से आय अर्जित कर सकती है; इसलिए, ये आरोप बेबुनियाद हैं।
इन दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने चुनाव याचिका खारिज कर दी और कहा कि जिन जानकारियों का खुलासा नहीं किया गया, वे न तो इतनी अहम थीं और न ही इतनी पर्याप्त थीं कि उनके आधार पर चुनाव को अमान्य ठहराया जा सके।
अदालत ने कहा कि चुने गए उम्मीदवार की संपत्ति से जुड़ी छोटी-मोटी, तकनीकी और गैर-जरूरी कमियों के आधार पर मतदाताओं के जनादेश को पलटने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर असर पड़ेगा। इन टिप्पणियों के साथ हाई कोर्ट ने बनावत के चुनाव को बरकरार रखा, साथ ही अदालत के समन से बचने की कोशिश करने के लिए उन्हें एक लाख रुपये का जुर्माना भरने का निर्देश दिया। Rajasthan High Court