Rajasthan Rural Development: गांव का बेटा, गांव का भाई बदल रहा है 52600 गांवों की किस्मत

पं. दीनदयाल उपाध्याय के अन्त्योदय को खेत, चौपाल और कारखानों में किया साकार

Published On

भारत की आर्थिक शक्ति, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान की गाथा को गढ़ने में गाँवों और किसानों की भूमिका सदैव अग्रणी रही है। हरित क्रांति से लेकर खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता तक, गाँवों और किसानों ने अपने खून पसीने से सींच कर जिस भारत के स्वाभिमान की रक्षा की, आज वे गाँव और किसान ही इस नए भारत का स्वाभिमान हैं। भारत की अर्थव्यवस्था को अपने कठोर परिश्रम और मजबूत कंधों पर संभालने वाले किसानों ने कभी नहीं सोचा होगा कि खेत की मिट्टी में सने, दूध बेचने वाला कभी नेतृत्व भी कर सकेगा। उन्होंने देश की नींव के पत्थर बनने का संकल्प किया था लेकिन धोरां री धरती ने उन्हें अपने माथे का तिलक बनाया। 

ऐसे ही भारत के छोटे-से गांव अटारी से निकलकर ''आपणो अग्रणी राजस्थान"  के उद्घोष से देश—विदेश को गुंजायमान करते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा आज भी प्रदेश के गाँवों में ही सुकून की नींद पाते हैं। स्वयं को गाँव का बेटा कहने वाले भजनलाल शर्मा गाँव की मिट्टी, गाँव का अपनापन और गाँवों में बसती भारत की रीढ़ को मजबूत करने के लिए सीधे उनके द्वार पर पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि “अपनों का विश्वास और स्नेह ही वह शक्ति है जो जनसेवा के संकल्पों को जन्म देती है।” इस आत्मीय जुड़ाव की  सहज अभिव्यक्ति जालौर जिले की पंसेरी ग्राम पंचायत में देखने को मिली, जहाँ 'ग्राम विकास चौपाल' के बाद मुख्यमंत्री ने भेमाराम के निवास पर ग्रामीणों के साथ रात्रि भोजन किया।

भजनलाल शर्मा का ग्रामीण प्रवास केवल विशेष अवसरों तक सीमित नहीं बल्कि उनकी कार्यशैली का निरंतर हिस्सा है। गाँवों में रात्रि विश्राम, ग्राम चौपाल और ग्रामीण परिवारों के बीच सहज सहभागिता के माध्यम से वे स्थानीय लोगों से सीधे जुड़ते हैं और उनकी समस्याओं, अपेक्षाओं एवं आकांक्षाओं को समझते हैं। इसी क्रम में एक वाकया प्रतापगढ़ जिले का है, जहां बंबोरी गाँव में भी रात्रि विश्राम एवं ग्राम चौपाल के दौरान ग्रामीणों के बीच पहुंचकर आत्मीय संवाद हुआ। उन्होंने वहां खाट चौपाल, चाय पर चर्चा और पैदल भ्रमण के माध्यम से ग्रामीणों की समस्याएँ सुनीं तथा महिलाओं, किसानों और युवाओं से सीधे संवाद कर जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी ली।

सीकर के जाजोद, अजमेर के कड़ैल, जालौर के पंसेरी, जयपुर के ठिकरिया, बांसवाड़ा के चुड़ादा, डूंगरपुर के धम्बोला और उदयपुर के बीड़ा समेत कई गाँवों में उन्होंने रात्रि चौपाल किए। जहां जन-आकांक्षाओं के अनुरूप मौके पर ही कई महत्वपूर्ण स्वीकृतियां जारी की गईं। इनमें उच्च माध्यमिक विद्यालय में विज्ञान संकाय की मंजूरी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) का CHC में उच्चीकरण, पशुपालकों के हित में सरस डेयरी केंद्र की स्थापना, युवाओं के लिए खेल मैदान का विकास तथा पेयजल सुदृढ़ीकरण हेतु नए कुओं के निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं। 

ग्रामीण क्षेत्रों के समावेशी विकास में ग्राम रथ अभियान भजनलाल सरकार की वह निर्णायक पहल है, जिसने ‘सरकार जनता के द्वार पर’ के संकल्प को हकीकत में बदल दिया। सैकड़ों गाँवों में एलईडी मोबाइल वैन के जरिए योजनाओं की सटीक जानकारी पहुँचाकर इस अभियान ने किसानों और पशुपालकों को जागरूक ही नहीं किया, बल्कि उन्हें आधुनिक कृषि तकनीक और सरकारी सुविधाओं का सीधा लाभ दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया।

यह अभियान साबित करता है कि डबल इंजन सरकार सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि राजस्थान के दूर दराज के गाँव तक विकास और जागरूकता पहुँचा रही है। इसके साथ ही ग्रामीण महिलाएं अपनी बात रख सकें, सुरक्षित और सशक्त हो सकें इसको सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री का अनूठा संबल सखी अभियान भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। महिलाएं अपनी बात सीधे प्रमुख नेतृत्व से कह सकती हैं चाहे कोई  उत्साहवर्धक किस्से हैं या कोई समस्या। एक बेटे, एक भाई, एक पिता की तरह अपने गाँवो में बसे उन सभी परिवारों की चिंता और प्रगति के लिए मुख्यसेवक भजनलाल शर्मा का यह एक सफल प्रयास है।

इतना ही नहीं भजनलाल सरकार ने वर्षों से जूझ रही पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) को लेकर केंद्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच जल समझौते पर हस्ताक्षर कर राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया है। पार्वती-कालीसिंध-चंबल (PKC-ERCP) लिंक परियोजना से पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों के हजारों गांवों को पेयजल व सिंचाई का स्थायी समाधान मिलेगा। साथ ही राजस्थान की 2.80 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का पानी मिल सकेगा।  

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश के हर गाँव और ढाणी के घरों में नल से जल पहुंचाना सुनिश्चित किया। सदियों से पानी के मटकों को सर पर ढोती, लम्बी कतारों में घंटों इंतजार करती महिलाओं और बच्चियों के सपनों को अब नई ऊर्जा मिल रही है। दौसा और सवाई माधोपुर की दशकों पुरानी जल समस्या भी अब इतिहास बनने जा रही है। 91,000 करोड़ रूपये की राशि से संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना के अंतर्गत 23,312 करोड़ रूपये के सात पेयजल कार्य प्रगति पर हैं। इनमें से 3,588 करोड़ रूपये की ईसरदा-दौसा परियोजना 1,256 गाँवों और 6 कस्बों में लगभग 35 लाख लोगों तक स्वच्छ जल पहुंचाएगी। 341 किलोमीटर मुख्य पाइपलाइन में से 299 किलोमीटर का कार्य पूरा हो चुका है, 225 एमएलडी फिल्टर प्लांट तैयार है और बांध से पानी पहुंच चुका है।

लालसोट, दौसा, बसवा और महुआ क्लस्टर सहित सवाई माधोपुर के 177 गांवों में पाइपलाइन बिछाने व जलाशयों के निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर जारी है, जिसका प्राथमिक लक्ष्य नवंबर तक शहरों में मुख्य पाइपलाइन से जलापूर्ति सुनिश्चित करना और ग्रामीण अंचल को चरणबद्ध रूप से सुरक्षित पेयजल नेटवर्क से जोड़ना है। बसवा क्लस्टर में 1,801 किलोमीटर पाइपलाइन बिछ चुकी है। वहीं करीब दो दशक पुराने पांचना बांध जल विवाद के ऐतिहासिक समाधान के साथ ही कमांड क्षेत्र की नहरों, गंभीर नदी और गुडला-पांचना लिफ्ट परियोजना में पानी का प्रवाह शुरू हो गया है। जल निकासी से पहले पहाड़ी गांव स्थित देवनारायण मंदिर परिसर में 61 करोड़ रुपये की लागत से गुडला-पांचना परियोजना के पुनरुद्धार और पीडीएन आधारित दो नवीन लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं का शिलान्यास और भूमि पूजन भी किया गया। ये परियोजनाएँ पूर्वी राजस्थान को जल संकट से हमेशा के लिए मुक्त करने की दिशा में निर्णायक कदम हैं।

शेखावाटी अंचल के लिए 34,000 करोड़ रूपये का यमुना जल समझौता हुआ है, जिसके तहत 1,622 करोड़ रूपये से पनोती कृत्रिम जलाशय बनाया जा रहा है। लगभग 15,000 करोड़ के बजट से 15 सितंबर 2026 को छह राज्यों के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते के तहत किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को मंजूरी मिली है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के अथक प्रयासों से राजस्थान को इस परियोजना से 124 मिलियन क्यूबिक मीटर जल आवंटित हुआ है। विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश के जल हिस्से का बड़ा भाग राजस्थान और दिल्ली को उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया, जिससे शेखावाटी क्षेत्र (सीकर, चूरू, झुंझुनू) में पेयजल और सिंचाई की उपलब्धता मजबूत होगी। वहीं नर्मदा समझौते के तहत जालौर, बाड़मेर और बालोतरा के लिए अतिरिक्त पानी जुटाने की डीपीआर तैयार की जा रही है। इसके साथ ही सिंचाई नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 15,953.19 करोड़ रूपये खर्च कर 1.42 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बढ़ाई जा रही है।

इसके अलावा कोटा-बारां-झालावाड़ के लिए 7,355 करोड़  रूपये की परवन परियोजना, गंगनहर के आधुनिकीकरण के लिए 1,742 करोड़ रूपये और बांसवाड़ा क्षेत्र में 2,500 करोड़ रूपये की माही कैनाल परियोजना पर काम जारी है। महाराजा गंगा सिंह द्वारा 5 दिसंबर 1925 को शिलान्यास की गई गंग नहर के शताब्दी समारोह में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने श्रीगंगानगर के साधुवाली में 1,717 करोड़ रूपये के व्यापक पुनरुद्धार कार्यों की घोषणा की। इसमें फिरोजपुर फीडर के पुनर्निर्माण के लिए 647 करोड़ रूपये, बीकानेर कैनाल के पुनरुद्धार हेतु 300 करोड़ रूपये, 3.14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के ऑटोमेशन के लिए 695 करोड़ रूपये और क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत के लिए 75 करोड़ रूपये की राशि शामिल है।  

 ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के लिए हर ग्राम पंचायत में चरणबद्ध अटल ज्ञान केंद्र और खेल मैदान तैयार हो रहे हैं। हर पंचायत स्तर पर बन रहे अटल ज्ञान केंद्र डिजिटल साक्षरता, ई-लाइब्रेरी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का केंद्र बन रहे हैं। इसके साथ ही ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों (RSETI) के माध्यम से युवाओं को विभिन्न ट्रेडों में व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे स्थानीय स्तर पर ही अपना उद्यम शुरू कर सकें।

भजनलाल सरकार ने लैक्रोस जैसे उभरते ओलंपिक खेल को विशेष प्रोत्साहन दिया है। उदयपुर के महाराणा प्रताप खेलगाँव में देश की पहली सरकारी लैक्रोस अकादमी और अंतरराष्ट्रीय स्तर का मैदान तैयार किया जा रहा है। उदयपुर विकास प्राधिकरण (UDA) द्वारा अंतरराष्ट्रीय मानकों का प्राकृतिक घास वाला मैदान तैयार करने में लगभग 82 लाख रुपये खर्च किया है। RSMML और राज्य सरकार की वित्तीय सहायता से जनजातीय गाँवों के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत रहे हैं। 

भजनलाल सरकार की पहल पर राजस्थान में ग्रामीण स्टार्टअप्स को भी मजबूत समर्थन मिल रहा है। iStart प्लेटफॉर्म के तहत Rural iStart कार्यक्रम चलाया जा रहा है। आइडिया से लेकर सीड फंडिंग तक सरकारी सहायता उपलब्ध है। कृषि-प्रसंस्करण, एग्रीटेक और स्थानीय उत्पादों पर आधारित स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जनजातीय क्षेत्रों में भी incubation centres खोले गए हैं, ताकि गाँव के युवा मुख्यधारा में जुड़ने के साथ ही अपने ही क्षेत्र में नवाचार और उद्यम शुरू कर स्वावलंबी बन सकें।

अंत्योदय केवल विचार नहीं आचरण की शैली है और इसीलिए मुख्यमंत्री की बैठक गांव के चौपाल में हो रही हैं। भजनलाल सरकार सचिवालय या बड़े दफ्तरों तक सीमित नहीं है। प्रदेश में अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक सरकार और सेवक दोनों उपस्थित होकर मौके पर शिकायतों का निपटारा कर रहे हैं।  पंडित दीनदयाल उपाध्याय गरीबी मुक्त गांव योजना के तहत 10 हजार गाँवों के सभी बीपीएल परिवारों को गरीबी रेखा से ऊपर लाने का काम धरातल पर हो रहा है।

पहले चरण में 5 हजार से अधिक गाँव चिह्नित किए गए हैं जहाँ लगभग 31 हजार बीपीएल परिवारों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। गरीबी रेखा से ऊपर आने वाले परिवारों को 21,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई और 17,891 खाते सत्यापित किए जा चुके हैं। दूसरे चरण की शुरुआत की जा चुकी है। बीपीएल परिवारों को स्वरोजगार के लिए अधिकतम 1 लाख रुपए की सहायता देने के साथ योजना के लिए 300 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। 

सड़क कनेक्टिविटी और कृषि सुविधाओं ने इस बदलाव को और मजबूत किया है।  वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 37,527 करोड़ रुपये से 51,790 किमी सड़कों का विकास; 9,704 करोड़ से लगभग 18,917 किमी नई सड़कें निर्मित हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में 12,311 करोड़ रूपये से अधिक खर्च कर 1,760 गाँव डामर सड़कों से जोड़े गए हैं। अटल प्रगति पथ योजना के तहत 5,000 से अधिक आबादी वाले गाँवों में 765 पथों के लिए 1,686 करोड़ की राशि स्वीकृत हुई थी जिसमें सैकड़ों के कार्य पूर्ण हो चुके हैं। किसानों को मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि (अतिरिक्त सहायता), सोलर पंप, फार्म पौंड, तारबंदी, सूक्ष्म सिंचाई जैसी योजनाओं से लाभ डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से बिना किसी बिचौलिए के सीधा लाभार्थी के बैंक खाते में मिल रहा है।⁠ 

सड़कों के साथ अब सार्वजनिक परिवहन भी गाँव-ढाणियों तक पहुँच रहा है। एक दशक बाद राजस्थान रोडवेज ने ग्रामीण क्षेत्रों में बस सेवा फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है। सीकर जैसे जिलों में नौ ग्रामीण रूट तय कर दिए गए हैं। निजी मिनी बसें रोडवेज के नियंत्रण में संचालित होंगी, रोडवेज बस स्टैंड से रवाना होंगी और महिलाओं व बुजुर्गों को मुख्य मार्गों जैसी किराया छूट मिलेगी। राज्य सरकार की ‘आपणी बस – राजस्थान रोडवेज’ पहल के तहत दूर-दराज के गाँवों को ब्लॉक और जिला मुख्यालयों से जोड़ा जा रहा है। इससे ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और रोजगार तक पहुँच आसान हो रही है। 

पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में सौर ऊर्जा अब सिर्फ बिजली का साधन नहीं, बल्कि आजीविका का नया आधार बन रही है। श्रीगंगानगर जिले में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत जोधपुर डिस्कॉम के 12 जिलों में सबसे आगे रहा है। जिले में 33,000 से अधिक आवेदन आए, जिनमें से 19,000 से ज्यादा घरों पर लगभग 66,000 किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट लग चुके हैं। इनमें से 18,500 से अधिक प्लांट सक्रिय हैं और रोजाना औसतन 2.84 लाख यूनिट बिजली पैदा कर रहे हैं। किसानों को PM-KUSUM योजना के तहत सोलर पंप भी तेजी से मिल रहे हैं। श्रीगंगानगर में ही वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 3,900 से अधिक किसानों ने सोलर पंप लगवाए हैं। अनूपगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में भी सामुदायिक सौर परियोजनाएँ और रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थानीय युवाओं के लिए स्थापना, रखरखाव और संबंधित सेवाओं में रोजगार के नए अवसर खोल रहे हैं। इससे न केवल बिजली बिल कम हो रहे हैं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से टिकाऊ आजीविका भी मजबूत हो रही है। 

सीमावर्ती गाँवों को अब ‘अंतिम’ नहीं, बल्कि ‘प्रथम’ गाँव बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। केन्द्र सरकार की वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम-II के तहत राजस्थान के 184 रणनीतिक सीमावर्ती गाँवों का समग्र विकास किया जा रहा है। इनमें श्रीगंगानगर के 68, बीकानेर के 46, बाड़मेर के 36, जैसलमेर के 30 और फलौदी के 4 गाँव शामिल हैं। इस कार्यक्रम के तहत अभी तक 123 गाँवों में 515 विकास कार्य प्रस्तावित किए गए हैं, जिनकी अनुमानित लागत 232 करोड़ रुपये से अधिक है। प्रत्येक रणनीतिक गाँव के लिए सालाना 3 करोड़ रुपये तक के कार्यों का प्रावधान है। सड़क कनेक्टिविटी, बिजली, टेलीकॉम, स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, कौशल विकास, पर्यटन और स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। साथ ही सीमावर्ती ब्लॉकों के 3,195 गाँवों में सड़क, बिजली, टेलीविजन और टेलीकॉम कनेक्टिविटी को शत-प्रतिशत संतृप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।

इतना ही नहीं बल्कि अब जनजातीय क्षेत्रों में 306 करोड़ रूपये की पर्यटन परियोजनाएं, इन गाँवों के आँगन की खुशबू और इसकी मिट्टी में संजोई हमारी संस्कृति को देश विदेश के कोने कोने में ख्याति प्रदान कर रही हैं। विश्वपटल पर राजस्थान की शान यहां की रंगारंग संस्कृति और सभ्यता है जिसको महिला शक्ति ने अपने कठोर तप से समृद्ध किया है। यही महिला शक्ति अपने इस कौशल का प्रतिनिधित्व करने में हर तरह से सक्षम बन सके इसको सुनिश्चित करने के लिए कई सफल योजनाएं चलाई जा रही हैं। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ा रही है। प्रदेश में 4.53 लाख स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 52.43 लाख परिवार आजीविका संवर्धन से जुड़े हैं।

लखपति दीदी पहल के तहत अब तक 18.49 लाख महिलाएँ लखपति दीदी बन चुकी हैं, जो वर्ष 2026-27 के 25 लाख के लक्ष्य का लगभग 74 प्रतिशत है। राजस्थान महिला निधि के जरिए 2.06 लाख से अधिक महिलाओं को 1,117.96 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया है। मुख्यमंत्री लखपति दीदी ऋण योजना में महिलाओं को मात्र 1.5 प्रतिशत ब्याज पर 1.50 लाख रुपये तक का ऋण मिल रहा है। ये प्रयास गाँव की महिलाओं को बचत से स्वरोजगार और स्वरोजगार से उद्यमिता की ओर ले जा रहे हैं।

डबल इंजन सरकार के सहयोग से केंद्र की ‘भव्या’ पहल के तहत जयपुर, जोधपुर, कोटा, बालोतरा, दौसा, खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना और जोधपुर-पाली-मारवार इंडस्ट्रियल एरिया को औद्योगिक हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, साथ ही दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का लाभ उठाने के लिए दौसा-बांदीकुई औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स हब की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2026 और भिवाड़ी में चिप पैकेजिंग प्लांट की स्थापना ने प्रदेश को हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स मैप पर ला खड़ा किया है, जहाँ 420 से अधिक औद्योगिक जोन और 94,000 एकड़ से अधिक लैंड बैंक औद्योगिक विकास को नई गति दे रहे हैं। Purnima

राजस्थान के मुख्यमंत्री के विकास की यात्रा का स्पष्ट संदेश है कि विकसित भारत@2047 और विकसित राजस्थान@2047 के लक्ष्य को सिद्ध करने का रास्ता हमारे गाँवों के घर-आंगन और गलियों से होकर गुज़रता है।

पूर्णिमा जैमिनी, यंग मीडिया सहायक, डीआईपीआर

About The Author

Comments

Post Comment

Related Posts