Sangaria News: बेजुबानों के लिए रतनपुरा की गलियों में बही मानवता की बयार

भीषण गर्मी में 'मसीहा' बनी संगरिया की साध-संगत

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संगरिया (सच कहूँ/सुरेन्द्र जग्गा)। ज्येष्ठ की तपती दुपहरी, आसमान से बरसती आग और झुलसा देने वाली गर्म हवाएं... जहाँ इंसान घरों की छटाक भर छाया ढूँढ रहा है, वहीं आसमान के इन नन्हे परिंदों का दर्द समझने वाला कौन है? इस मरुधरा की प्यासी धरती पर जब बेजुबान पक्षी पानी की एक बूंद के लिए तड़प रहे हैं, तब डेरा सच्चा सौदा के सेवादारों ने करुणा और ममता की एक नई इबारत लिखी है। संगरिया ब्लॉक के गाँव रतनपुरा में मानवता का एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी की आँखें नम कर दीं। Sangaria News

डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणाओं से लबरेज होकर, यहाँ की साध-संगत ने 'पक्षियोंद्धार' मुहिम के तहत बेजुबान पक्षियों के लिए अपने हाथ बढ़ाए। इस मौके पर सच्ची प्रेमी समिति सेवादार साजन इन्सां, कृष्णलाल इन्सां, गांव के प्रेमी सेवक वीरेंद्र इन्सां, अंकित इन्सां, सुखवीर इन्सां, रवि इन्सां, गोविंद इन्सां, संदीप बाघला इन्सां, राहुल इन्सां, श्रीराम इन्सां, समाजसेवी सुभाष गोदारा, अनंत राम शर्मा, विजय सिंह राहड़, भीम गोदारा, बृज लाल भादू, बॉबी पोटलिया, अनिल पोटलिया व लेखराम बुडानिया आदि मौजूद रहे।

स्कूल की चौखट से शुरू हुआ संवेदनाओं का सफर

इस पुनित कार्य का आगाज महात्मा गांधी गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रांगण से हुआ। जब सेवादारों ने पेड़ों की ऊंची टहनियों पर मिट्टी के सकोरे (परिंडे) बांधे, तो ऐसा लगा मानो कुदरत भी मुस्कुरा उठी हो। शाह सतनाम जी ग्रीन एस वैल्फेयर कमेटी के इन जांबाजों ने संकल्प लिया कि वे किसी भी पक्षी को प्यास से दम नहीं तोड़ने देंगे। देखते ही देखते, गांव की छतों, बालकनी और सार्वजनिक स्थानों पर 32 परिंडे टांग दिए गए।

सिर्फ परिंडे नहीं, जीवन का संकल्प है ये | Sangaria News

लालचंद इन्सां और ओम प्रकाश बुडानिया इन्सां के शब्दों में अपने गुरु के प्रति अटूट आस्था और बेजुबानों के लिए झलकती ममता साफ दिखाई दी। उन्होंने कहा, "ये सिर्फ मिट्टी के बर्तन नहीं हैं, बल्कि उन नन्हे पंखों वाले मेहमानों के लिए जीवन का आधार हैं जो बोल नहीं सकते।" सेवादारों ने केवल परिंडे बांधे ही नहीं, बल्कि हर सुबह उनमें शीतल जल डालने का संकल्प' भी लिया, जो आज के स्वार्थी युग में दुर्लभ है।

प्रिंसिपल व ग्रामीणों के छलके जज्बात

विद्यालय के प्रिंसिपल गुरमीत सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि जब चिलचिलाती धूप में कोई पक्षी इन परिंडों से अपनी प्यास बुझाएगा, तो उन दुआओं का मोल कोई नहीं चुका पाएगा। समाजसेवी सुभाष गोदारा और अनंत राम शर्मा ने भी कहा कि डेरा सच्चा सौदा के ये सेवादार समाज के लिए वो ठंडी छाँव हैं, जो निस्वार्थ भाव से हर जीव के दर्द को अपना समझते हैं।  इस मौके पर उपस्थित सभी सेवादारों के चेहरों पर वह संतोष था, जो करोड़ों रुपये खर्च करके भी हासिल नहीं होता। वाकई, जब इंसानियत जागती है, तभी सृष्टि के हर जीव को जीने का हक मिलता है। Sangaria News

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