Punjab
भीषण गर्मी में ‘लू’ का कहर, जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी - डॉ. प्रदीप जैन
अक्षय नर्सिंग होम के चिकित्सक ने दी चेतावनी, लक्षण पहचानकर तुरंत करें बचाव
बड़ौत (सच कहूँ/डॉ संदीप कुमार दहिया)। Baraut News: क्षेत्र में बढ़ती गर्मी के बीच लू (हीट स्ट्रोक) के मामलों में तेजी देखी जा रही है। अक्षय नर्सिंग होम के प्रबंध निदेशक और प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. प्रदीप जैन ने लोगों को आगाह करते हुए कहा कि लू को सामान्य बीमारी समझना बड़ी भूल हो सकती है। समय पर ध्यान न देने पर यह गंभीर और जानलेवा स्थिति बन सकती है। डॉ. प्रदीप जैन ने बताया कि लू लगना शरीर के तापमान नियंत्रण तंत्र के असंतुलित होने का परिणाम है। जब तेज धूप और गर्म हवाओं के संपर्क में शरीर लंबे समय तक रहता है, तो वह खुद को ठंडा नहीं रख पाता और तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है।
लक्षण और कारण को नजरअंदाज करना खतरनाक
उन्होंने बताया कि लू लगने के शुरुआती संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है। तेज बुखार, सिर में भारीपन, चक्कर आना, उल्टी, अत्यधिक कमजोरी, त्वचा का लाल और सूखा होना, तेज धड़कन, भ्रम की स्थिति और बेहोशी इसके प्रमुख लक्षण हैं। कई मामलों में पसीना आना बंद हो जाता है, जो स्थिति के गंभीर होने का संकेत है।
लू लगने के पीछे मुख्य कारणों में तेज धूप में अधिक समय तक रहना, शरीर में पानी और लवण की कमी, धूप में भारी काम करना, तंग और गहरे रंग के कपड़े पहनना तथा खाली पेट बाहर निकलना शामिल हैं। बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार व्यक्ति सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं।
सावधानी ही सुरक्षा, अपनाएं ये आसान उपाय
डॉ. प्रदीप जैन ने बताया कि लू से बचाव पूरी तरह संभव है, यदि समय रहते सावधानी बरती जाए। उन्होंने सलाह दी कि दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो सिर को कपड़े या टोपी से ढकें और आंखों को भी सुरक्षित रखें।
दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और शरीर को निर्जलित न होने दें। नींबू पानी, छाछ, लस्सी, नारियल पानी और मौसमी फलों का सेवन शरीर को ठंडा बनाए रखने में सहायक होता है। हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनना भी जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि धूप से घर लौटने के तुरंत बाद ठंडा पानी पीने से बचें और शरीर को सामान्य तापमान में आने दें। यदि किसी व्यक्ति में लू के लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत ठंडी जगह पर ले जाकर आराम दें, शरीर को ठंडा करें और बिना देरी चिकित्सकीय सहायता लें।
डॉ. जैन ने अंत में कहा कि “लू से बचाव ही सबसे बड़ा उपचार है।” थोड़ी सी जागरूकता और सतर्कता से इस गंभीर समस्या से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखा जा सकता है।