टेसू झांझी का सजा बाजार, बड़े व बच्चे पहुंच रहे हैं खरीदने

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जगह जगह रखे हुए नजर आने लगे है टेसू | Firozabad News

  • 50 रुपए से लेकर 200 तक के बिक्री को तैयार हैं टेसू

फिरोजाबाद (सच कहूँ/विकास पालीवाल)। शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) 16 अक्टूबर बुधवार को है। इस पर्व को लेकर टेसू झांझी का बाजार जगह जगह सजा है, वैसे अभी ग्राहक कम ही पहुंच रहे हैं। जनपद में कई स्थानों पर और इसके आसपास क्षेत्र में सड़कों के किनारे बिक्री के लिए रखे टेसू और झांझी लोगों का ध्यान सहज ही आकर्षित कर रहे हैं। दशहरा के बाद अब टेसू झांझी के रूप में मनाए जाने वाले त्योहार पूर्णिमा को लेकर तैयारियां तथा बच्चों में इन्हें लेकर उत्सुकता देखी जा रही है। छोटे आकार के टेसू 50 रुपए तथा झाँझी 30 रुपए की दी जा रही है। वहीं दोनों के एक साथ लेने पर 70 रुपए में दोनों दिए जा रहे है। Firozabad News

 इस तरह बच्चों से लेकर बड़े तक मनाते हैं पर्व

शरद पूर्णिमा के दिन टेसू और झांझी का विवाह होता है। छोटे लड़के तीन खपच्चियों पर टेसू का शीश सा बनाकर टोलियों में घर-घर घूमकर पैसे मांगते हैं। छोटी बच्चियां एक छेदों वाली छोटी मटकी में दिया जलाकार टेसू की पत्नी झाझी के नाम पर पैसे मांगती हैं । किसी सार्वजनिक स्थान पर धूमधाम से टेसू और सांझी का विवाह कर दिया जाता है।

महाभारत से है इसका जुुड़ाव, होती है खाटू श्याम के रूप में पूजा | Firozabad News

टेसू का नाता महाभारत से है। कहा जाता है कि टेसू जिनका वास्तविक नाम बर्बरीक था। वे परमवीर और महादानी थे। उन्होंने अपनी मां को वचन दिया था कि महाभारत में जिसकी सेना हार रही होगी, वह उसकी ओर से युद्ध लड़ेंगे। भगवान श्रीकृष्ण को पता था कि अगर बर्बरीक कौरवों की तरफ से युद्ध लड़ेंगे तो वह एक दिन में ही महाभारत युद्ध समाप्त कर देंगे। पांडवों की हार होगी। इसलिए उन्होंने बर्बरीक से उनका सिर मांग लिया। बर्बरीक ने सिर भगवान को अर्पित कर दिया। बर्बरीक के सिर को तीन डंडियों के सहारे पर्वत पर रख दिया गया, जहां से उन्होंने पूरा महाभारत देखा। भगवान कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया था कि कलयुग में खाटू श्याम के नाम से उनकी पूजा की जाएगी। Firozabad News

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