UP Railway: यूपी वालों के लिए अच्छी खबर, इन जिलों से होकर गुजरेगी ये नई रेलवे लाइन, 10 राज्यों को होगा फायदा

up railway: यात्रियों और उद्योगों के लिए बड़ी खुशखबरी! गाजियाबाद से बुढ़वल तक बनेगी तीसरी-चौथी रेल लाइन, 2-3 घंटे बचेगा सफर

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up railway लखनऊ। उत्तर प्रदेश जल्द ही देश के सबसे बड़े रेल कनेक्टिविटी हब के रूप में उभरने जा रहा है। केंद्र सरकार ने गाजियाबाद से सीतापुर तक प्रस्तावित तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना का विस्तार करते हुए इसे बुढ़वल तक ले जाने का फैसला किया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से न केवल रेल यातायात को नई रफ्तार मिलेगी, बल्कि उत्तर भारत से लेकर पूर्वी भारत तक माल और यात्रियों की आवाजाही भी पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगी।

10 राज्यों को मिलेगा सीधा फायदा | up railway

गाजियाबाद से बुढ़वल तक तीसरी और चौथी रेल लाइन बनने के बाद हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के बीच माल परिवहन और यात्री सेवाओं में बड़ा सुधार होगा। इससे औद्योगिक क्षेत्रों से तैयार उत्पादों की तेज और सुगम आवाजाही संभव होगी।

आर्थिक गलियारे को मिलेगी मजबूती

सीतापुर से बुढ़वल तक करीब 96 किलोमीटर लंबे सेक्शन पर तीसरी और चौथी रेल लाइन का निर्माण प्रस्तावित आर्थिक गलियारे की महत्वपूर्ण कड़ी बनेगा। यह मार्ग लुधियाना से दानकुनी तक पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का एक प्रभावी विकल्प भी साबित हो सकता है, जिससे मालगाड़ियों का दबाव कम होगा और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क अधिक मजबूत बनेगा।

ट्रेनों का दबाव होगा कम

वर्तमान में गाजियाबाद से सीतापुर तक केवल दो रेल लाइनें हैं, जिन पर लखनऊ, बुढ़वल, देहरादून, जम्मू-कश्मीर और पंजाब की ओर जाने वाली यात्री ट्रेनों के साथ-साथ बड़ी संख्या में मालगाड़ियां भी संचालित होती हैं। अधिक ट्रैफिक के कारण ट्रेनों की गति प्रभावित होती है और देरी की समस्या बनी रहती है। नई लाइनों के बनने से यह दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा।

बनेंगे नए रेलवे स्टेशन

इस परियोजना के तहत कई नए रेलवे स्टेशन भी विकसित किए जाएंगे। इनमें न्यू हापुड़, न्यू मुरादाबाद, न्यू रामपुर, न्यू बरेली, न्यू शाहजहांपुर और न्यू सीतापुर शामिल हैं। इन स्टेशनों के बनने से स्थानीय यात्रियों और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

चार साल में पूरा होगा प्रोजेक्ट

सरकार का लक्ष्य इस परियोजना को अगले चार वर्षों में पूरा करने का है। इसके बाद रेल नेटवर्क की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और हर वर्ष करीब 36 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव हो सकेगी।

लॉजिस्टिक्स लागत में होगी बड़ी बचत

इस परियोजना के पूरा होने के बाद देश की लॉजिस्टिक्स लागत में हर साल लगभग 2,877 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। साथ ही निर्माण और संचालन के दौरान करीब 264 लाख मानव-दिवस का रोजगार भी सृजित होगा।

उद्योगों को मिलेगा नया बाजार

नई रेल लाइन से गाजियाबाद की मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा इंडस्ट्री, मुरादाबाद के पीतल और हैंडीक्राफ्ट उद्योग, शाहजहांपुर के फर्नीचर, टेक्सटाइल और कारपेट उद्योग तथा सीतापुर की दरी उद्योग को बड़ा लाभ मिलेगा। उत्पादों को देश के विभिन्न राज्यों तक कम समय और कम लागत में पहुंचाया जा सकेगा।

लखनऊ के लिए खुलेगा नया रेल मार्ग

फिलहाल लखनऊ-सीतापुर रेलखंड सिंगल लाइन होने के कारण ट्रेनों का दबाव काफी अधिक रहता है। इस परियोजना के साथ यदि लखनऊ-सीतापुर सेक्शन का दोहरीकरण भी पूरा होता है, तो दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के लिए एक वैकल्पिक रेल मार्ग तैयार हो जाएगा। इससे कई ट्रेनों को नए रूट पर संचालित किया जा सकेगा।

2 से 3 घंटे तक घट सकता है सफर

रोजा जंक्शन पर कई रेल लाइनों का ट्रैफिक एक साथ आने के कारण ट्रेनों को अक्सर लंबा इंतजार करना पड़ता है। तीसरी और चौथी रेल लाइन बनने के बाद मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों का बेहतर प्रबंधन संभव होगा। इससे ट्रेनों की औसत गति बढ़ेगी और लखनऊ से दिल्ली तथा जम्मू-कश्मीर की यात्रा में करीब 2 से 3 घंटे तक की बचत हो सकती है। यह परियोजना केवल रेल लाइन विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश को देश के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक और लॉजिस्टिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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