ISRO लॉन्च कर रहा यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम

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बेंगलुरु(एजेंसी)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) प्रमुख के. सिवन ने बताया है कि इसरो एक महीने का युवा विज्ञानी कार्यक्रम लॉन्च कर रही है। इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक राज्य से तीन विद्यार्थी चुने जाएंगे। इन्हें शिक्षित किया जाएगा और शोध तथा विकास प्रक्रिया से जुड़ी प्रयोगशालाओं तक उनकी पहुंच बनाई जाएगी, ताकि वे उपग्रह बनाने का वास्तविक अनुभव हासिल हो सके।

2019 में इसरो बॉर्डर सिक्यॉरिटी सैटलाइट लांच करेगा

इसरो प्रमुख ने बताया कि हमने त्रिपुरा में इनक्यूबेशन सेंटर विकसित किया है और त्रिची, नागपुर, राउरकेला तथा इंदौर में चार और इनक्यूबेशन सेंटर बनाए जाएंगे। गगनयान मिशन को लेकर इसरो चेयरमैन के सिवन ने कहा, ‘इस साल गगनयान मिशन हमारी प्राथमिकता रहेगी और गृह मंत्रालय की मदद के लिए भी सैटलाइट लॉन्च की जाएगी। साल 2019 में इसरो बॉर्डर सिक्यॉरिटी सैटलाइट लांच करेगा। 2020 में पहला मानव रहित मिशन और 2022 में दूसरा मानव रहित मिशन पूरा किया जाएगा।

  • इसमें पहली उपलब्धि सोवियत संघ (आज के रूस) के नाम है
  • जिसने 1957 में दुनिया का पहला कृत्रिम उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़ा था।
  • इसकी सफलता से उत्साहित सोवियत संघ ने 12 अप्रैल, 1961 को अपने नागरिक यूरी एलेकसेविच गागरिन को वोस्टॉक-1 नामक यान से स्पेस में भेजा था।
  • इसके बाद से रूस वोस्टॉक, वोस्खोड और सोयूज यानों से करीब 74 मानव मिशनों को अंतरिक्ष में भेज चुका है।
  • इसके बाद बारी आई अमेरिका की, जिसने 5 मई, 1961 को अपने नागरिक एलन बी शेपर्ड को प्रोजेक्ट मरकरी मिशन के तहत स्पेसक्राफ्ट फ्रीडम-7 से अंतरिक्ष में रवाना किया।

 हर राज्य से चुने जाएंगे तीन विद्यार्थी

इसके बाद से अमेरिकी स्पेस एजेंसी-नासा 200 से ज्यादा मानव मिशन अंतरिक्ष में भेज चुकी है। यह करिश्मा करने वालों की सूची में तीसरा देश चीन है, जिसने 15 अक्टूबर, 2003 को अपने नागरिक यांग लिवेई को शिंझोऊ-5 यान से अंतरिक्ष में भेजा था। वैसे तो इस अवधि में कई अमीर पर्यटक भी स्पेस टूरिज्म के तहत अंतरिक्ष की सैर कर चुके हैं और आने वाले वक्त में संभवत: दर्जनों लोग निजी कंपनियों की मदद से स्पेस की यात्र का आनंद ले सकेंगे, लेकिन जो बात देश का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वदेशी यानों से अंतरिक्ष में पदार्पण करने में है, उसकी तुलना नहीं हो सकती है।

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