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    सबसे पहले डिजिटल बना था बैंक ऑफ इंडिया

    Bank of India was first made digital
    बैंक ऑफ इंडिया भारत के अग्रणी बैंकों में से एक है और 29 विदेशी शाखाओं को मिलाकर इसकी कुल 4,293 शाखाएं हैं। इन शाखाओं के 50 क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से नियंत्रित कर रहे हैं। शाखाओं की अधिकतम संख्या मुंबई फिर अहमदाबाद और पुणे में हैं। बैंक ऑफ इंडिया भारत में स्विफ्ट का एक संस्थापक सदस्य है। बैंक ने 7 सितंबर 2006 को अपने प्रचालन के पहले 114 वर्ष पूरे कर लिए हैं। शुरूआत में इसका मुंबई में एक ही कार्यालय था, इसकी चुकता पूंजी रु. 50 लाख थी और इसमें 50 कर्मचारी थे। प्रगति के पथ पर अग्रसर होते हुए बैंक ने तीव्र विकास किया है और बैंक ने एक शक्तिशाली संस्थान के रूप में उभरकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सुदृढ़ मौजूदगी दर्ज की है। बैंक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी पर्याप्त परिचालन कर रहा है। कारोबार मात्रा में बैंक ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अपनी अहम स्थिति बना रखी है। विदेशों में बैंक की 56 शाखाएं/कार्यालय तथा 5 अनुशंगियां तथा 1 संयुक्त उद्यम है।
    बैंक ने 1997 में अपनी पहली पब्लिक इश्यू जारी की और फरवरी, 2008 में क्वालिफाइड इंश्टीट्यूशन्स प्लेस्मेनट का पालन किया। दृृढ़ता से समझदारी और सावधानी की नीति को अपनाते हुए बैंक, विभिन्न नवोन्मेषी सेवाएं और सिस्टम आरंभ करने में सबसे आगे रहा है। पारंपारिक मूल्यों और नीतियों तथा आधुनिकतम संरचना के सफल मिश्रण से कारोबार किया जा रहा है। बैंक ऑफ इंडिया राष्ट्रीयकृत बैंकों में पहला ऐसा बैंक है जिसने 1989 में मुंबई शहर की महालक्ष्मी शाखा को पूर्णतया कम्प्यूटरीकृत किया और एटीएम सुविधा स्थापित की। 1982 में ऋण संविभाग के मूल्यांकन/रेटिंग के लिए हेल्थ कोड प्रणाली की शुरूआत की गई। बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना मुंबई के प्रतिष्ठित व्यवसायियों के एक समूह द्वारा 7 सितंबर (आज ही के दिन), 1906 में की गई थी। यह बैंक जुलाई, 1969 तक निजी स्वामित्व में था और 13 अन्य बैंकों के साथ इसका राष्ट्रीकरण किया गया था।

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