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    क्या कांग्रेस प्रत्याशी को मिल सकेगी पिता की ‘विरासत’

    Congress

    सच कहूँ/विजय शर्मा करनाल। करनाल सीट पर बीजेपी ने 2014 के बाद एक बार फिर पंजाबी (congress-7) प्रत्याशी पर ही दाव खेला है। करनाल सीएम सिटी है और सीएम मनोहर लाल खट्टर भी पंजाबी समुदाय से हैं। करनाल पहले ब्राह्मण सीट मानी जाती रही है इसलिए यहां से कांग्रेस ने ब्राह्मण चेहरा मैदान में उतारा है। मौजूदा समय में निवर्तमान सांसद अश्विनी कुमार चौपड़ा की धर्मपत्नी किरण चौपड़ा शर्मा भी करनाल से बीजेपी की टिकटार्थी थी लेकिन मुख्यमंत्री मनोहर लाल की सलाह पर पानीपत के संजय भाटिया को बीजेपी ने मैदान में उतारा। इसलिए दो कारणों से यहां पर मनोहर लाल की प्रतीष्ठा दाव पर लग गई है। एक तो प्रत्याशी मुख्यमंत्री मनोहर लाल की पसंद का है, दूसरे करनाल विधानसभा क्षेत्र से मनोहर लाल खट्टर विधायक हैं। वहीं बीजेपी ने जीत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा का कार्यक्रम तय किया जा रहा था लेकिन अचानक अब अमित शाह पानीपत में जनसभा को संबोधित करेंगे।

    मतदाताओं की संख्या

    साल 2014 में हरियाणा की करनाल लोकसभा सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 16 लाख 84 हजार 321 थी। तब बीजेपी के अश्विनी कुमार चौपड़ा ने 5 लाख 94 हजार 817 वोट पाकर साल 1999 के बाद बीजेपी की जीत के साथ करनाल लोकसभा सीट वापसी कराई थी। अब 2019 में मतदाताओं की संख्या बढ़कर 18 लाख 98 हजार 919 हो गई है। इनमें 10 लाख 14 हजार 176 पुरूष व 8 लाख 84 हजार 718 महिलाओं की संख्या हो गई है।

    देशभर में मिसाल बने थे स्वामी रामेश्वरानंद

    करनाल सीट से जनसंघ की टिकट पर सांसद बने स्वामी रामेश्वरानंद  देशभर में एक मिसाल बने थे। सांसद चुने जाने के बाद स्वामी रामेश्वरानंद ने कोई सरकारी आवास नहीं लिया। वे पुरानी दिल्ली के आर्यसमाज मंदिर में रहते थे और खुद ही या मांग कर सादी रोटी खाते थे। अपने हाथ की बनाई रोटी वे कपड़े में लपेटकर जेब में रखकर ले जाया करते थे और जमीन पर बैठकर उन रोटियों को खाया करते थे। इतना ही नहीं वे संसद तक समय पर पैदल ही पहुंचते थे। एक बार प्रधानमंत्री स्व. इंदिरागांधी ने सांसदों को भोजन पर आमंत्रित किया था तो जब इंदिरा गांधी ने देखा कि एक सांसद धरती पर बैठकर रूखी सूखी रोटियां खा रहा है तो इंदिरा गांधी ने उनसे आग्रह किया कि वे आमंत्रित किए गए हैं। सांसदों के साथ भोजन कर लें तो स्वामी जी ने कहा कि मैं एक संन्यासी हूं राजभोजन कैसे कर सकता हूं। उन्होंने सभी के सामने वही रूखी-सूखी रोटियां खाई। वास्तव में स्वामी जी गुरूकुल घरोंडा के आचार्य थे।

    कांग्रेस अब तक 9 बार जीती और बीजेपी 3 बार

    साल 2014 में करनाल लोकसभा सीट पर हुए चुनाव में मौजूदा समय में देश की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के उम्मीदवार अश्विनी कुमार चोपड़ा ने जीत प्राप्त की थी। बीजेपी नेता अश्विनी कुमार चोपड़ा ने अपने शानदार प्रदर्शन की सहायता से कांग्रेस के प्रत्याशी अरविंद कुमार शर्मा, इंडियन लोकदल के कैंडिडेट जसविंदर सिंह संधू, बीएसपी के नेता वीरेंद्र वर्मा मराठा और दिग्गज नेता अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार परमजीत सिंह को हराया था। इससे पहले पिछले दो लोकसभा चुनावों में करनाल लोकसभा सीट पर कांग्रेस जीतती आ रही थी लेकिन 2014 के चुनाव में मोदी लहर के चलते बीजेपी ने कांग्रेस का विजय रथ रोक दिया था। 2014 के जनादेश में करनाल से बीजेपी के अश्विनी कुमार ने शानदार तरीके से जीत हासिल की थी। अश्विनी कुमार ने यहां से दो बार लगातार कांग्रेस से सांसद रहे अरविंद कुमार शर्मा को 3,60,147 वोटों से हराया था। करनाल सीट कांग्रेस ने 1951 से अबतक 9 बार और बीजेपी ने 3 बार जीती है।

    कुलदीप शर्मा और कुलदीप शर्मा और संजय भाटिया में सीधा मुकाबला

    यूं तो अब विभिन्न राजनीतिक दलों व आजाद को मिलाकर 16 प्रत्याशी करनाल लोकसभा सीट से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन असल कांटे की टक्कर बीजेपी के संजय भाटिया व कांग्रेस के कुलदीप शर्मा के बीच है। हालांकि जेजेपी-आप गठबंधन के कृष्ण अग्रवाल व इनेलो के धर्मवीर पाढ़ा भी मैदान में हैं। कुलदीप शर्मा के हक में सबसे बड़ी बात ये है कि वीरेंद्र मराठा अब कांग्रेस में हैं और उनके साथ लगे हुए हैं। अपने को मजबूत समझते हुए कांग्रेस वापसी की ताल ठोक रही है। कुलदीप शर्मा के पिता चिरंजीलाल शर्मा यहां से लगातार चार बार सांसद चुने गए थे। वहीं पूर्व विधानसभा स्पीकर कुलदीप शर्मा भी मोदी लहर के बावजूद गन्नोर से दो बार विधायक की सीट पर जीत हासिल कर चुके हैं और देखना ये है कि करनाल सीट से कांग्रेस प्रत्याशी को क्या अपने पिता की ‘विरासत’ मिल सकेगी।

    यही वो स्थान जहां धरती की गोद में समा गई थी ‘सीता’

    करनाल शहर को महाभारत के राजा कर्ण ने बसाया था, राजा कर्ण के नाम पर ही शहर का नाम करनाल पड़ा। इतिहास के पन्नों में झांके तो करनाल में ही नादिरशाह ने मुगल बादशाह मुहम्मद शाह को हराया था। 1805 में इस शहर पर अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया था। यह शहर महान सम्राट पृथ्वीराज चौहान का भी गढ़ रहा है, आज भी शहर में चौहान का किला मौजूद है। करनाल में अनेक बड़ी फैक्ट्रियां हैं। यहां कंबल और जूते के कारोबार के उद्योग बड़े पैमाने पर लगे हुए हैं। पर्यटन के नजरिये से कलंदर शाह गुंबद, छावनी चर्च और सीता माई मंदिर खास है। कहा जाता है कि यही वह स्थान है जहां सीता धरती की गोद में समा गई थी।

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