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Wednesday, March 4, 2026
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    कश्मीर के बहाने अपने स्वार्थ में जुटे ट्रंप

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    आतंकवाद व कई अन्य मामलों में अमेरिका अपनी दोगली नीतियों के कारण आलोचना का शिकार होता रहा है। ताजा मामले में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कश्मीर से संबंधित गोलमोल तरीके से बयान देकर दोबारा मुद्दे को गर्मा दिया है। कुछ दिन पूर्व पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने यह दावा किया था कि भारत ने अमेरिका को कश्मीर पर मध्यस्थता के लिए कहा है लेकिन व्हाईट हाऊस ने इसे बेबुनियाद करार देकर खंडन कर दिया। एक सप्ताह बाद डोनाल्ड ट्रम्प कह रहे हैं यदि भारत की इच्छा हो तो अमेरिका कश्मीर का मामला सुलझाने के लिए मध्यस्थता कर सकता है।

    ट्रम्प की बयानबाजी साधारण नहीं बल्कि यह उनकी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। ट्रम्प को कश्मीर से अधिक प्यार अब ही क्यों आया? यह सवाल बड़ा अहम है। ट्रम्प अगले कार्यकाल की तैयारी के तौर पर अपनी छवि सुधारने में जुटे हुए हैं। अमेरिका में ट्रम्प राजनीति में बुरी तरह पिट चुके हैं और वहां का मीडिया ट्रम्प द्वारा बोले गए झूठों का आंकलन कर रहा है। मैक्सिको सीमा पर लोहे की दीवार मामले में भी ट्रम्प की फजीयत हुई है। मैक्सिको सीमा पर मर रहे शणार्थियों की वायरल हो रही तस्वीरों ने ट्रम्प प्रशासन की मुश्किलें बढ़ाई हैं।

    अफगानिस्तान में भी अमेरिका को कोई सफलता प्राप्त नहीं हुई व लगातार धमकी भरे शब्दों को इस्तेमाल करने से ट्रम्प की बदनामी ही हुई है। ट्रम्प ने अमेरिकावाद का फार्मूला भी शुरू से इस्तेमाल किया है और वे अमेरिकियों को रोजगार देने पर नाम पर गैर-अमेरीकियों के लिए नफरत का माहौल पैदा कर रहे हैं। बराक ओबामा प्रशासन में एक भी गैर-अमेरीकी पर हमले की खबर चर्चा का विषय बनती थी परंतु आज कल प्रतिदिन ही हिंसा की घटनाएं घटित होने लगी हैं, जिसका सरकार की सेहत पर कोई प्रभाव नहीं दिखाई दे रहा।

    ट्रम्प अपना ग्राफ ऊंचा उठाने के लिए कभी अफगानिस्तान में कार्रवाई की धमकी देते हैं और कभी कश्मीर मसले के हल के लिए अपनी दखल का शगूफा छोड़ते हैं। अफगानिस्तान में अमेरीकी सेना की कार्रवाई का अमेरीकी जनता समर्थन नहीं करती, फिर भी वे (ट्रम्प) अपने आप को नायक सिद्ध करने में लगे हुए हैं। भारत अनेकों बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर को द्विपक्षीय बातचीत करार दे चुका है। ट्रम्प की बयानबाजी बेतुकी और गैर -जरूरी और नये विवाद को जन्म देने वाली है। ङ्म२ अपनी, नाकामियों को छुपाने के लिए कश्मीर का हथियार न इस्तेमाल करे।