Agriculture News: जलसंभर प्रबंधन पर राष्ट्रीय बैठक, नए तकनीकी दिशा-निर्देशों पर मंथन
विश्व बैंक की मदद से कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए जलसंभरण दिशा-निर्देशों पर बैठक आयोजित
नई दिल्ली (एजेंसी)। Agriculture News: ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग और 'राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण' ने यहां एक दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक का आयोजन किया। बैठक का मुख्य उद्देश्य विश्व बैंक के सहयोग से चल रहे 'रिवार्ड' कार्यक्रम के तहत देश में जलसंभर (पानी और मिट्टी के संरक्षण) के बेहतर प्रबंधन के लिए नए राष्ट्रीय तकनीकी दिशा-निर्देशों के मसौदे पर चर्चा करना था।
यहां के पूसा परिसर में चली दो दिवसीय (17 -18 जून) बैठक में राष्ट्रीय तकनीकी दिशा-निर्देशों के मसौदे पर विचार-विमर्श किया गया और देश भर में जलसंभर नियोजन, कार्यान्वयन, निगरानी और स्थिरता को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञों के सुझावों पर विचार किया गया। बैठक से हुए विचार-विमर्श वर्षा आधारित क्षेत्रों में जलसंभर शासन में सुधार और जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशीलता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
बैठक में इस बात पर बल दिया कि जलसंभर प्रबंधन विज्ञान, सामुदायिक भागीदारी और प्रशासनिक सरलता पर आधारित होना चाहिए, जिसमें किसानों और स्थानीय जलसंभर संस्थानों पर विशेष ध्यान दिया जाए। दिशा-निर्देश तैयार करते समय वर्षा आधारित क्षेत्रों के विकास, कृषि उत्पादकता में सुधार, फसल सघनता बढ़ाने, जल सुरक्षा और भूजल पुनर्भरण को मजबूत करने, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन विकसित करने और जलसंभर संपत्तियों की मरम्मत और रखरखाव सुनिश्चित करने के राष्ट्रीय लक्ष्यों को ध्यान में रखना होगा।
इस चर्चा में निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी, डेटा-आधारित दृष्टिकोण, समन्वय, पीआरआई की भागीदारी और परियोजना के बाद की स्थिरता जैसे बिंदुओं पर जोर दिया गया था। इसके अलावा, उन्होंने चैटबॉट के साथ सक्षम अनुप्रयोगों के एकीकरण, प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी और मूल्यांकन प्रणालियों के उपयोग, मजबूत डीएसएस के विकास और राष्ट्रीय वेब पोर्टल प्रणालियों पर बल दिया गया ताकि भविष्य के जलसंभर कार्यक्रमों के लिए सार्थक परिणाम मिल सकें।
बैठक में जलसंभरण पर योजना बनाने के लिए उच्च रिज़ॉल्यूशन वाली इमेजरी प्राप्त करने हेतु ड्रोन प्रौद्योगिकी के उपयोग, एलआरआई और हाइड्रोलॉजी-लाइट दृष्टिकोणों को अपनाने, प्रभावी जलसंभर कार्यान्वयन के लिए राज्यों में संस्थागत और कार्यान्वयन तंत्रों में सुधार करने और तकनीकी सेवा प्रदाताओं, संस्थानों/एनजीओ की भागीदारी के माध्यम से जलसंभर संपत्तियों के परियोजना-पश्चात रखरखाव और स्थिरता के लिए तंत्रों का पता लगाने पर विचार-विमर्श करने का सुझाव भी सामने आया।
इस बैठक में भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेंद्र भूषण और राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चंद्र शेखर कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इस बैठक में विश्व बैंक, नाबार्ड, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, और 'रिवार्ड' कार्यक्रम से जुड़े राज्यों के लगभग 100 राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भाग लिया।
