372 ई-रवाने और सिर्फ एक पोकलेन! धनोरा खनन क्षेत्र में उठे कई सवाल

खनन विभाग के नोटिस ने खोली जांच की नई राह, ई-रवाना सिस्टम से लेकर जमीनी हकीकत तक पर निगाह

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छछरौली (सच कहूं/राजेंद्र कुमार)। Chhachhrauli News: धनोरा खनन क्षेत्र में संचालित जेपीवाई रॉयल्टी कंपनी को खनन विभाग द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे खनन तंत्र की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी बहस छेड़ रहा है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार 8 जून 2026 को कंपनी के नाम से 372 ई-रवाने जारी हुए। दूसरी ओर निरीक्षण के दौरान मौके पर केवल एक पोकलेन मशीन संचालित पाई गई। यही वह बिंदु है जिसने विभाग को कंपनी से स्पष्टीकरण मांगने के लिए मजबूर किया।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एक दिन में सैकड़ों वाहन खनिज सामग्री लेकर निकले हैं तो उसके लिए पर्याप्त मशीनरी, श्रमिक और लोडिंग व्यवस्था का होना स्वाभाविक माना जाता है। ऐसे में विभाग यह समझना चाहता है कि उपलब्ध संसाधनों के साथ इतनी बड़ी संख्या में ई-रवाने किस प्रकार जारी किए गए। ई-रवाना प्रणाली का उद्देश्य खनिज परिवहन को पारदर्शी बनाना है। हर वाहन के लिए ऑनलाइन परमिट जारी किया जाता है ताकि खनन से लेकर परिवहन तक की निगरानी हो सके। लेकिन जब रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति में अंतर दिखाई देता है तो सवाल उठना लाजिमी हो जाता है।

खनन क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। यदि कंपनी विभाग को तकनीकी और तथ्यात्मक आधार पर संतोषजनक जवाब देती है तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। वहीं यदि जवाब रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता तो मामला अवैध खनन, फर्जी परिवहन अथवा ई-रवाना प्रणाली के दुरुपयोग की दिशा में भी जा सकता है।

दिलचस्प बात यह है कि पिछले कुछ वर्षों में यमुना नदी क्षेत्र में खनन गतिविधियों को लेकर कई बार विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में धनोरा का यह मामला एक बार फिर खनन व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही को चर्चा के केंद्र में ले आया है।

फिलहाल विभाग ने कंपनी को तीन दिन का समय दिया है। अब सबकी निगाह कंपनी के जवाब और उसके बाद होने वाली विभागीय कार्रवाई पर टिकी है। यह मामला केवल 372 ई-रवानों का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी है जो अवैध खनन रोकने के लिए बनाई गई थी।

जांच के केंद्र में 5 सवाल

372 ई-रवानों के लिए कितने वाहन वास्तव में पहुंचे? 
एक पोकलेन से इतनी मात्रा में लोडिंग संभव थी? 
क्या मौके पर अन्य मशीनें निरीक्षण से पहले हटाई गई थीं? 
ई-रवाना जारी करने की प्रक्रिया में कोई तकनीकी खामी है? 
विभागीय जांच आगे किन तथ्यों को उजागर करेगी?

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