Annadar and the future of the country

अन्नदाता और देश के भविष्य की सुध लें सियासतदां

एक तरफ देश जब सत्रहवीं लोकसभा के धुन में रमा हुआ है। उसी रामधुन के बीच जब राजनैतिक शुचिता और मयार्दाएं तार-तार हो रहीं। उस परिवेश में इसका सख़्त परीक्षण होना चाहिए, क्या व्यक्तिगत लांछन और आरोप लगाकर ही राजनीति की जा सकती? क्या देश में अन्य मुद्दों का अकाल पड़ गया है, जो राजनीतिक […]
विचार