beam

प्रकाश के उस अथाह पुंज में

Boundless Beam धरा पर आकाश नन्ही बूंद क्यों बरसा रहा? शीतल मंद समीर भी सुन सन सन सन कुछ गा रहा! धरा ने भी धुंध का परिधान क्यों धारण किया? बन गई दुल्हन संवर के किससे ये घूंघट किया! हरित-हार श्रंगार करके किसका इंतजार करती? अलंकृत हो करके क्यों है? खुशी का इजहार करती! चहकती […]
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