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किसी मर्ज की दवा न बना नोटबंदी का फैसला

नोटबंदी लागू करने के दो साल बाद भी वे परिणाम नहीं दिख सके जिनके दावे सरकार ने जोर-शोर से किए थे। सैद्धांतिक तौर पर नोटबन्दी एक आर्थिक-राजनैतिक निर्णय होता है जिसे लागू करने की जिम्मेदारी सरकार की होती है किंतु जब इस निर्णय का संतुलन बिगड़कर केवल राजनेताओं के हाथों में आ जाए तो अर्थ […]
सम्पादकीय