Constitutional

लोकतंत्र में हिंसक बनते संवैधानिक अधिकार

लोकतंत्र में हमारे अधिकार हिंसक क्यों बन रहे हैं। हम संविधान उसके विधान और व्यवस्था को हाथ में लेकर खुद न्यायी क्यों बनना चाहते हैं। संविधान में लोकतांत्रिक ढंग से अपनी बात रखने की पूरी आजादी है। हर वह व्यक्ति, संस्था, समूह, दल और संगठन अपनी बात वैचारिक रुप से रख सकता है। यह लोकतांत्रिक […]
लेख 

आपातकाल ने लोकतंत्र को संवैधानिक तानाशाही में बदल दिया था : जेटली

नई दिल्ली(एजेंसी)। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने करीब चार दशक पूर्व (25 जून, 1975) इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लागू ‘कपटपूर्ण’ आपातकाल को याद करते हुए रविवार को कहा कि इसमें संवैधानिक प्रावधानों का इस्तेमाल लोकतंत्र को संवैधानिक आपातकाल में बदलने के लिए किया गया। जेटली ने लिखा ‘द इमरजेंसी रीविजिटेड’ शीर्षक से फेसबुक पोस्ट की […]
फटाफट न्यूज़  उत्तर प्रदेश  देश