Deteriorating nature of villages

गांवों का बिगड़ता हुआ स्वरूप

आधुनिक ओर पाश्चात्य संस्कृति की दौड़ में आज गांवों का वो रहन सहन और सामाजिक परिवेश लगभग आधुनिकता की अंधी दौड़ की भेंट चढ़ रहा है। आज अगर हम देंखे तो वो पहले वाले गांव कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। आज अगर देखा जाए तो गांव न तो गांव रह गए हैं ओर ना […]
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