हमसे जुड़े

Follow us

30 C
Chandigarh
Wednesday, March 25, 2026
More
    Home फीचर्स साहित्य गजल : ग़रीबों ...

    गजल : ग़रीबों को फ़क़त, उपदेश की घुट्टी पिलाते हो

    गरीबों को फ़क़त, उपदेश की घुट्टी पिलाते हो
    बड़े आराम से तुम, चैन की बंसी बजाते हो

    है मुश्किल दौर, सूखी रोटियाँ भी दूर हैं हमसे
    मज़े से तुम कभी काजू, कभी किशमिश चबाते हो

    नज़र आती नहीं, मुफ़लिस की आँखों में तो ख़ुशहाली
    कहाँ तुम रात-दिन, झूठे उन्हें सपने दिखाते हो

    अँधेरा करके बैठे हो, हमारी ज़िन्दगानी में,
    मगर अपनी हथेली पर, नया सूरज उगाते हो

    व्यवस्था कष्टकारी क्यों न हो, किरदार ऐसा है
    ये जनता जानती है सब, कहाँ तुम सर झुकाते हो।
    -महावीर उत्तरांचली

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।