Nursery Business: कृषि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर : डॉ. पुष्पेंद्र सिंह चौहान

नर्सरी व्यवसाय से जुड़कर कृषि के छात्र बन सकते हैं रोजगारदाता

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जोबनेर। वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इससे जुड़े विभिन्न उद्यम युवाओं के लिए स्वरोजगार एवं रोजगार सृजन के नए अवसर प्रदान कर रहे हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण क्षेत्र पौध नर्सरी व्यवसाय है, जिसमें कृषि के विद्यार्थी अपनी वैज्ञानिक जानकारी एवं तकनीकी दक्षता के आधार पर सफल उद्यमी बन सकते हैं। Nursery Business

श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के कुलगुरु डॉ. पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने शुक्रवार को एक नर्सरी के उद्घाटन समारोह में यह बात कही। उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को रोजगार प्राप्त करने के लिए तैयार करना नहीं है, बल्कि उन्हें इतना सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनाना है कि वे स्वयं उद्यम स्थापित कर अन्य युवाओं के लिए भी रोजगार के अवसर उपलब्ध करा सकें।

डॉ. चौहान ने कहा कि पौध नर्सरी व्यवसाय कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र का तेजी से विकसित होने वाला व्यवसाय है, जिसमें अपेक्षाकृत कम निवेश के साथ अच्छा लाभ अर्जित किया जा सकता है। फल, सब्जी, फूल, औषधीय तथा सजावटी पौधों की बढ़ती मांग के कारण इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि कृषि विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों को पौध उत्पादन, पौध संरक्षण, बीज विज्ञान, आधुनिक सिंचाई तकनीकों तथा उद्यमिता से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। विद्यार्थी इस ज्ञान का उपयोग करते हुए फलदार पौधों, सब्जियों की पौध, सजावटी पौधों तथा औषधीय पौधों की वैज्ञानिक नर्सरी स्थापित कर सफल व्यवसाय की शुरुआत कर सकते हैं।

कुलगुरु ने कहा कि वर्तमान समय में पॉलीहाउस, शेडनेट हाउस, ट्रे नर्सरी तथा ड्रिप सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाली पौध तैयार की जा रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं सोशल मीडिया के माध्यम से पौधों की ऑनलाइन बिक्री भी युवाओं के लिए नए अवसर उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि कृषि स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थी केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं तथा स्टार्टअप कार्यक्रमों का लाभ उठाकर कृषि आधारित उद्यम स्थापित कर सकते हैं। Nursery Business

डॉ. चौहान ने कहा कि नर्सरी व्यवसाय आर्थिक लाभ के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने तथा जैव विविधता के संवर्धन में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री उपलब्ध होने से फल एवं सब्जी उत्पादन में वृद्धि होती है तथा किसानों की आय बढ़ाने में सहायता मिलती है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे पारंपरिक नौकरी की अपेक्षा उद्यमिता को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ें तथा कृषि क्षेत्र में नवाचार एवं आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कृषि के विद्यार्थी अपनी योग्यता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बल पर रोजगार मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार प्रदान करने वाले बन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पौध नर्सरी उद्योग कृषि अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा और इसमें प्रशिक्षित कृषि स्नातकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं एवं उद्यमिता विकास कार्यक्रमों का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया, ताकि वे सफल कृषि उद्यमी बनकर ग्रामीण विकास और देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा प्रदान कर सकें। इस अवसर पर नर्सरी के संचालक डॉ. एस.एस. शेखावत ने बताया कि वर्तमान में नर्सरी व्यवसाय रोजगार सृजन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न हो रही चुनौतियों से निपटने तथा हरित आवरण बढ़ाने में पौध नर्सरियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

कार्यक्रम में राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा के निदेशक डॉ. सुरेंद्र सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कृषि आधारित उद्यमिता को समय की आवश्यकता बताया तथा युवाओं से आधुनिक तकनीकों को अपनाकर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया।अधिष्ठा कृषि महाविद्यालय डॉ डी के गोठवाल ने भी अपने विचार व्यक्त किये / इस अवसर पर बड़ी संख्या में किसान ,कृषि विशेषज्ञ, विद्यार्थी एवं  ग्रामीण युवा उपस्थित रहे। Nursery Business

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